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وَيَسْتَجِيْبُ الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا وَعَمِلُوا الصّٰلِحٰتِ وَيَزِيْدُهُمْ مِّنْ فَضْلِهٖ ۗوَالْكٰفِرُوْنَ لَهُمْ عَذَابٌ شَدِيْدٌ   ( الشورى: ٢٦ )

And He answers
وَيَسْتَجِيبُ
और वो (दुआ) क़ुबूल करता है
those who
ٱلَّذِينَ
उनकी जो
believe
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
and do
وَعَمِلُوا۟
और उन्होंने अमल किए
righteous deeds
ٱلصَّٰلِحَٰتِ
नेक
and increases (for) them
وَيَزِيدُهُم
और वो ज़्यादा देता है उन्हें
from
مِّن
अपने फ़ज़ल से
His Bounty
فَضْلِهِۦۚ
अपने फ़ज़ल से
And the disbelievers -
وَٱلْكَٰفِرُونَ
और जो काफ़िर हैं
for them
لَهُمْ
उनके लिए
(will be) a punishment
عَذَابٌ
अज़ाब है
severe
شَدِيدٌ
शदीद

Wayastajeebu allatheena amanoo wa'amiloo alssalihati wayazeeduhum min fadlihi waalkafiroona lahum 'athabun shadeedun (aš-Šūrā 42:26)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

और वह उन लोगों की प्रार्थनाएँ स्वीकार करता है जो ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए। और अपने उदार अनुग्रह से उन्हें और अधिक प्रदान करता है। रहे इनकार करनेवाले, तो उनके लिए कड़ा यातना है

English Sahih:

And He answers [the supplication of] those who have believed and done righteous deeds and increases [for] them from His bounty. But the disbelievers will have a severe punishment. ([42] Ash-Shuraa : 26)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम करते रहे उनकी (दुआ) क़ुबूल करता है फज़ल व क़रम से उनको बढ़ कर देता है और काफिरों के लिए सख्त अज़ाब है