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सूरह अल-अह्काफ़ आयत ३५

فَاصْبِرْ كَمَا صَبَرَ اُولُوا الْعَزْمِ مِنَ الرُّسُلِ وَلَا تَسْتَعْجِلْ لَّهُمْ ۗ كَاَنَّهُمْ يَوْمَ يَرَوْنَ مَا يُوْعَدُوْنَۙ لَمْ يَلْبَثُوْٓا اِلَّا سَاعَةً مِّنْ نَّهَارٍ ۗ بَلٰغٌ ۚفَهَلْ يُهْلَكُ اِلَّا الْقَوْمُ الْفٰسِقُوْنَ ࣖ  ( الأحقاف: ٣٥ )

So be patient
فَٱصْبِرْ
पस सब्र कीजिए
as
كَمَا
जैसा कि
had patience
صَبَرَ
सब्र किया
those of determination
أُو۟لُوا۟
उलुल अज़म /हिम्मत वालों ने
those of determination
ٱلْعَزْمِ
उलुल अज़म /हिम्मत वालों ने
of
مِنَ
रसूलों में से
the Messengers
ٱلرُّسُلِ
रसूलों में से
and (do) not
وَلَا
और ना
seek to hasten
تَسْتَعْجِل
आप जल्दी तलब कीजिए
for them
لَّهُمْۚ
उनके लिए
As if they had
كَأَنَّهُمْ
गोया कि वो
(the) Day
يَوْمَ
जिस दिन
they see
يَرَوْنَ
वो देखेंगे
what
مَا
जो
they were promised
يُوعَدُونَ
वो वादा किए जाते हैं
not
لَمْ
नहीं
remained
يَلْبَثُوٓا۟
वो ठहरे
except
إِلَّا
मगर
an hour
سَاعَةً
एक घड़ी
of
مِّن
दिन की
a day
نَّهَارٍۭۚ
दिन की
A clear Message
بَلَٰغٌۚ
पहुँचा देना है
But will
فَهَلْ
तो नहीं
(any) be destroyed
يُهْلَكُ
हलाक किया जाएगा
except
إِلَّا
मगर
the people
ٱلْقَوْمُ
उन लोगों को
the defiantly disobedient?
ٱلْفَٰسِقُونَ
जो फ़ासिक़ हैं

Faisbir kama sabara oloo al'azmi mina alrrusuli wala tasta'jil lahum kaannahum yawma yarawna ma yoo'adoona lam yalbathoo illa sa'atan min naharin balaghun fahal yuhlaku illa alqawmu alfasiqoona (al-ʾAḥq̈āf 46:35)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

अतः धैर्य से काम लो, जिस प्रकार संकल्पवान रसूलों ने धैर्य से काम लिया। और उनके लिए जल्दी न करो। जिस दिन वे लोग उस चीज़ को देख लेंगे जिसका उनसे वादा किया जाता है, तो वे महसूस करेंगे कि जैसे वे बस दिन की एक घड़ी भर ही ठहरे थे। यह (संदेश) साफ़-साफ़ पहुँचा देना है। अब क्या अवज्ञाकारी लोगों के अतिरिक्त कोई और विनष्ट होगा?

English Sahih:

So be patient, [O Muhammad], as were those of determination among the messengers and do not be impatient for them. It will be – on the Day they see that which they are promised – as though they had not remained [in the world] except an hour of a day. [This is] notification. And will [any] be destroyed except the defiantly disobedient people? ([46] Al-Ahqaf : 35)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

तो (ऐ रसूल) पैग़म्बरों में से जिस तरह अव्वलुल अज्म (आली हिम्मत), सब्र करते रहे तुम भी सब्र करो और उनके लिए (अज़ाब) की ताज़ील की ख्वाहिश न करो जिस दिन यह लोग उस कयामत को देखेंगे जिसको उनसे वायदा किया जाता है तो (उनको मालूम होगा कि) गोया ये लोग (दुनिया में) बहुत रहे होगें तो सारे दिन में से एक घड़ी भर तो बस वही लोग हलाक होंगे जो बदकार थे