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अल-अम्बिया आयत ९० | Al-Ambiya 21:90

So We responded
فَٱسْتَجَبْنَا
तो दुआ क़ुबूल कर ली हमने
to him
لَهُۥ
उसकी
and We bestowed
وَوَهَبْنَا
और अता किया हमने
on him
لَهُۥ
उसे
Yahya
يَحْيَىٰ
यहया
and We cured
وَأَصْلَحْنَا
और दुरुस्त कर दी हमने
for him
لَهُۥ
उसके लिए
his wife
زَوْجَهُۥٓۚ
बीवी उसकी
Indeed they
إِنَّهُمْ
यक़ीनन वो
used (to)
كَانُوا۟
थे वो
hasten
يُسَٰرِعُونَ
वो जल्दी करते
in
فِى
नेकियों में
good deeds
ٱلْخَيْرَٰتِ
नेकियों में
and they supplicate to Us
وَيَدْعُونَنَا
और वो पुकारते थे हमें
(in) hope
رَغَبًا
रग़बत
and fear
وَرَهَبًاۖ
और ख़ौफ़ से
and they were
وَكَانُوا۟
और थे वो
to Us
لَنَا
हमारे ही लिए
humbly submissive
خَٰشِعِينَ
ख़ुशूअ करने वाले

Faistajabna lahu wawahabna lahu yahya waaslahna lahu zawjahu innahum kanoo yusari'oona fee alkhayrati wayad'oonana raghaban warahaban wakanoo lana khashi'eena

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

अतः हमने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली और उसे याह्या् प्रदान किया और उसके लिए उसकी पत्नी को स्वस्थ कर दिया। निश्चय ही वे नेकी के कामों में एक-दूसरे के मुक़ाबले में जल्दी करते थे। और हमें ईप्सा (चाह) और भय के साथ पुकारते थे और हमारे आगे दबे रहते थे

English Sahih:

So We responded to him, and We gave to him John, and amended for him his wife. Indeed, they used to hasten to good deeds and supplicate Us in hope and fear, and they were to Us humbly submissive.

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

तो हमने उनकी दुआ सुन ली और उन्हें यहया सा बेटा अता किया और हमने उनके लिए उनकी बीबी को अच्छी बता दिया इसमें शक नहीं कि ये सब नेक कामों में जल्दी करते थे और हमको बड़ी रग़बत और ख़ौफ के साथ पुकारा करते थे और हमारे आगे गिड़गिड़ाया करते थे

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

तो हमने सुन ली उसकी पुकार तथा प्रदान कर दिया उसे यह़्या और सुधार दिया उसके लिए उसकी पत्नी को। वास्तव में, वे सभी दौड़-धूप करते थे सत्कर्मों में और हमसे प्रार्थना करते थे रूचि तथा भय के साथ और हमारे आगे झुके हुए थे।