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مِمَّا خَطِيْۤـٰٔتِهِمْ اُغْرِقُوْا فَاُدْخِلُوْا نَارًا ەۙ فَلَمْ يَجِدُوْا لَهُمْ مِّنْ دُوْنِ اللّٰهِ اَنْصَارًا  ( نوح: ٢٥ )

Because of
مِّمَّا
बवजह
their sins
خَطِيٓـَٰٔتِهِمْ
अपनी ख़ताओं के
they were drowned
أُغْرِقُوا۟
वो ग़र्क़ किए गए
then made to enter
فَأُدْخِلُوا۟
फिर वो दाख़िल किए गए
(the) Fire
نَارًا
आग में
and not
فَلَمْ
फिर ना
they found
يَجِدُوا۟
उन्होंने पाया
for themselves
لَهُم
अपने लिए
from
مِّن
सिवाए
besides
دُونِ
सिवाए
Allah
ٱللَّهِ
अल्लाह के
any helpers
أَنصَارًا
कोई मददगार

Mimma khateeatihim oghriqoo faodkhiloo naran falam yajidoo lahum min dooni Allahi ansaran (Nūḥ 71:25)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

वे अपनी बड़ी ख़ताओं के कारण पानी में डूबो दिए गए, फिर आग में दाख़िल कर दिए गए, फिर वे अपने और अल्लाह के बीच आड़ बननेवाले सहायक न पा सके

English Sahih:

Because of their sins they were drowned and put into the Fire, and they found not for themselves besides Allah [any] helpers. ([71] Nuh : 25)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

(आख़िर) वह अपने गुनाहों की बदौलत (पहले तो) डुबाए गए फिर जहन्नुम में झोंके गए तो उन लोगों ने ख़ुदा के सिवा किसी को अपना मददगार न पाया