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۞ وَمَآ اُبَرِّئُ نَفْسِيْۚ اِنَّ النَّفْسَ لَاَمَّارَةٌ ۢ بِالسُّوْۤءِ اِلَّا مَا رَحِمَ رَبِّيْۗ اِنَّ رَبِّيْ غَفُوْرٌ رَّحِيْمٌ  ( يوسف: ٥٣ )

"And not
وَمَآ
और नहीं
I absolve
أُبَرِّئُ
मैं बरी करता/करती
myself
نَفْسِىٓۚ
अपने नफ़्स को
Indeed
إِنَّ
बेशक
the soul
ٱلنَّفْسَ
नफ़्स
(is) a certain enjoiner
لَأَمَّارَةٌۢ
अलबत्ता बहुत हुक्म देने वाला है
of evil
بِٱلسُّوٓءِ
बुराई का
unless
إِلَّا
मगर
[that]
مَا
जिस पर
bestows Mercy
رَحِمَ
रहम करे
my Lord
رَبِّىٓۚ
मेरा रब
Indeed
إِنَّ
बेशक
my Lord
رَبِّى
मेरा रब
(is) Oft-Forgiving
غَفُورٌ
बहुत बख़्शने वाला है
Most Merciful"
رَّحِيمٌ
निहायत रहम करने वाला है

Wama obarrio nafsee inna alnnafsa laammaratun bialssooi illa ma rahima rabbee inna rabbee ghafoorun raheemun (Yūsuf 12:53)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

मैं यह नहीं कहता कि मैं बुरी हूँ - जी तो बुराई पर उभारता ही है - यदि मेरा रब ही दया करे तो बात और है। निश्चय ही मेरा रब बहुत क्षमाशील, दयावान है।'

English Sahih:

And I do not acquit myself. Indeed, the soul is a persistent enjoiner of evil, except those upon which my Lord has mercy. Indeed, my Lord is Forgiving and Merciful." ([12] Yusuf : 53)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और (यूं तो) मै भी अपने नफ्स को गुनाहो से बे लौस नहीं कहता हूँ क्योंकि (मैं भी बशर हूँ और नफ्स बराबर बुराई की तरफ उभारता ही है मगर जिस पर मेरा परवरदिगार रहम फरमाए (और गुनाह से बचाए)