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अन नहल आयत ११५ | An-Nahl 16:115

Only
إِنَّمَا
बेशक
He has forbidden
حَرَّمَ
उसने हराम किया
to you
عَلَيْكُمُ
तुम पर
the dead animal
ٱلْمَيْتَةَ
मुर्दार
and the blood
وَٱلدَّمَ
और ख़ून
and the flesh
وَلَحْمَ
और गोशत
(of) the swine
ٱلْخِنزِيرِ
ख़िन्ज़ीर का
and what
وَمَآ
और जो
has been dedicated
أُهِلَّ
पुकारा जाए
to other (than)
لِغَيْرِ
वास्ते ग़ैर
Allah
ٱللَّهِ
अल्लाह के
[with it]
بِهِۦۖ
उस पर
But (if) one
فَمَنِ
तो जो कोई
(is) forced -
ٱضْطُرَّ
मजबूर किया गया
without (being)
غَيْرَ
ना
disobedient
بَاغٍ
रग़बत करने वाला हो
and not
وَلَا
और ना
a transgressor -
عَادٍ
हद से गुज़रने वाला
then indeed
فَإِنَّ
तो बेशक
Allah
ٱللَّهَ
अल्लाह
(is) Oft-Forgiving
غَفُورٌ
बहुत बख़्शने वाला है
Most Merciful
رَّحِيمٌ
निहायत रहम करने वाला है

Innama harrama 'alaykumu almaytata waalddama walahma alkhinzeeri wama ohilla lighayri Allahi bihi famani idturra ghayra baghin wala 'adin fainna Allaha ghafoorun raheemun

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

उसने तो तुमपर केवल मुर्दार, रक्त, सुअर का मांस और जिसपर अल्लाह के सिवा किसी और का नाम लिया गया हो, हराम ठहराया है। फिर यदि कोई इस प्रकार विवश हो जाए कि न तो उसकी ललक हो और न वह हद से आगे बढ़नेवाला हो तो निश्चय ही अल्लाह बड़ा क्षमाशील, दयावान है

English Sahih:

He has only forbidden to you dead animals, blood, the flesh of swine, and that which has been dedicated to other than Allah. But whoever is forced [by necessity], neither desiring [it] nor transgressing [its limit] – then indeed, Allah is Forgiving and Merciful.

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

उसकी नेअमत का शुक्र अदा किया करो तुम पर उसने मुरदार और खून और सूअर का गोश्त और वह जानवर जिस पर (ज़बाह के वक्त) ख़ुदा के सिवा (किसी) और का नाम लिया जाए हराम किया है फिर जो शख़्श (मारे भूक के) मजबूर हो ख़ुदा से सरतापी (नाफरमानी) करने वाला हो और न (हद ज़रुरत से) बढ़ने वाला हो और (हराम खाए) तो बेशक ख़ुदा बख्शने वाला मेहरबान है

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

जो कुछ उसने तुमपर ह़राम (अवैध) किया है, वह मुर्दार, रक्त और सुअर का मांस है और जिसपर अल्लाह के सिवा दूसरे का नाम लिया गया[1] हो, फिर जो भूख से आतुर हो जाये, इस दशा में कि वह नियम न तोड़ रहा[2] हो और न आवश्यक्ता से अधिक खाये, तो वास्तव में, अल्लाह अति क्षमाशील, दयावान् है।