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अन नहल आयत ३५ | An-Nahl 16:35

And said
وَقَالَ
और कहा
those who
ٱلَّذِينَ
उन लोगों ने जिन्होंने
associate partners (with Allah)
أَشْرَكُوا۟
शिर्क कया
"If
لَوْ
अगर
Allah (had) willed
شَآءَ
चाहता
Allah (had) willed
ٱللَّهُ
अल्लाह
not
مَا
ना
we (would) have worshipped
عَبَدْنَا
इबादत करते हम
other than Him
مِن
उसके सिवा
other than Him
دُونِهِۦ
उसके सिवा
any
مِن
किसी चीज़ की
thing
شَىْءٍ
किसी चीज़ की
we
نَّحْنُ
हम
and not
وَلَآ
और ना
our forefathers
ءَابَآؤُنَا
आबा ओ अजदाद हमारे
and not
وَلَا
और ना
we (would) have forbidden
حَرَّمْنَا
हराम करते हम
other than Him
مِن
उसके (हुक्म) के सिवा
other than Him
دُونِهِۦ
उसके (हुक्म) के सिवा
anything"
مِن
किसी चीज़ को
anything"
شَىْءٍۚ
किसी चीज़ को
Thus
كَذَٰلِكَ
इसी तरह
did
فَعَلَ
किया था
those who
ٱلَّذِينَ
उन लोगों ने जो
(were) before them
مِن
उनसे पहले थे
(were) before them
قَبْلِهِمْۚ
उनसे पहले थे
Then is (there)
فَهَلْ
तो नहीं है
on
عَلَى
रसूलों पर
the messengers
ٱلرُّسُلِ
रसूलों पर
except
إِلَّا
मगर
the conveyance
ٱلْبَلَٰغُ
पहुँचाना
clear?
ٱلْمُبِينُ
खुल्लम-खुल्ला

Waqala allatheena ashrakoo law shaa Allahu ma 'abadna min doonihi min shayin nahnu wala abaona wala harramna min doonihi min shayin kathalika fa'ala allatheena min qablihim fahal 'ala alrrusuli illa albalaghu almubeenu

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

शिर्क करनेवालों का कहना है, 'यदि अल्लाह चाहता तो उससे हटकर किसी चीज़ की न हम बन्दगी करते और न हमारे बाप-दादा ही और न हम उसके बिना किसी चीज़ को अवैध ठहराते।' उनसे पहले के लोगों ने भी ऐसा ही किया। तो क्या साफ़-साफ़ सन्देश पहुँचा देने के सिवा रसूलों पर कोई और भी ज़िम्मेदारी है?

English Sahih:

And those who associate others with Allah say, "If Allah had willed, we would not have worshipped anything other than Him, neither we nor our fathers, nor would we have forbidden anything through other than Him." Thus did those do before them. So is there upon the messengers except [the duty of] clear notification?

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और मुशरेकीन कहते हैं कि अगर ख़ुदा चाहता तो न हम ही उसके सिवा किसी और चीज़ की इबादत करते और न हमारे बाप दादा और न हम बग़ैर उस (की मर्ज़ी) के किसी चीज़ को हराम कर बैठते जो लोग इनसे पहले हो गुज़रे हैं वह भी ऐसे (हीला हवाले की) बातें कर चुके हैं तो (कहा करें) पैग़म्बरों पर तो उसके सिवा कि एहकाम को साफ साफ पहुँचा दे और कुछ भी नहीं

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

और कहा, जिन लोगों ने शिर्क (मिश्रणवाद) कियाः यदि अल्लाह चाहता, तो हम उसके सिवा किसी चीज़ की इबादत (वंदना) न करते, न हम और न हमारे बाप-दादा और न उसके आदेश के बिना किसी चीज़ को ह़राम (वर्जित) करते। ऐसे ही, इनसे पूर्व वाले लोगों ने किया। तो रसूलों पर केवल खुले रूप से उपदेश पहुँचा देना है।