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نَحْنُ نَقُصُّ عَلَيْكَ نَبَاَهُمْ بِالْحَقِّۗ اِنَّهُمْ فِتْيَةٌ اٰمَنُوْا بِرَبِّهِمْ وَزِدْنٰهُمْ هُدًىۖ   ( الكهف: ١٣ )

We
نَّحْنُ
हम
narrate
نَقُصُّ
हम बयान करते हैं
to you
عَلَيْكَ
आप पर
their story
نَبَأَهُم
ख़बर उनकी
in truth
بِٱلْحَقِّۚ
साथ हक़ के
Indeed they (were)
إِنَّهُمْ
बेशक वो
youths
فِتْيَةٌ
चंद नौजवान थे
who believed
ءَامَنُوا۟
जो ईमान लाए
in their Lord
بِرَبِّهِمْ
अपने रब पर
and We increased them
وَزِدْنَٰهُمْ
और ज़्यादा कर दिया हमने उन्हें
(in) guidance
هُدًى
हिदायत में

Nahnu naqussu 'alayka nabaahum bialhaqqi innahum fityatun amanoo birabbihim wazidnahum hudan (al-Kahf 18:13)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

हम तुन्हें ठीक-ठीक उनका वृत्तान्त सुनाते है। वे कुछ नवयुवक थे जो अपने रब पर ईमान लाए थे, और हमने उन्हें मार्गदर्शन में बढ़ोत्तरी प्रदान की

English Sahih:

It is We who relate to you, [O Muhammad], their story in truth. Indeed, they were youths who believed in their Lord, and We increased them in guidance. ([18] Al-Kahf : 13)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

(ऐ रसूल) अब हम उनका हाल तुमसे बिल्कुल ठीक तहक़ीक़ातन (यक़ीन के साथ) बयान करते हैं वह चन्द जवान थे कि अपने (सच्चे) परवरदिगार पर ईमान लाए थे और हम ने उनकी सोच समझ और ज्यादा कर दी है