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حُنَفَاۤءَ لِلّٰهِ غَيْرَ مُشْرِكِيْنَ بِهٖۗ وَمَنْ يُّشْرِكْ بِاللّٰهِ فَكَاَنَّمَا خَرَّ مِنَ السَّمَاۤءِ فَتَخْطَفُهُ الطَّيْرُ اَوْ تَهْوِيْ بِهِ الرِّيْحُ فِيْ مَكَانٍ سَحِيْقٍ   ( الحج: ٣١ )

Being upright
حُنَفَآءَ
यक्सू हो कर
to Allah
لِلَّهِ
अल्लाह के लिए
not
غَيْرَ
ना
associating partners
مُشْرِكِينَ
शरीक करने वाले
with Him
بِهِۦۚ
साथ उसके
And whoever
وَمَن
और जो
associates partners
يُشْرِكْ
शिर्क करेगा
with Allah
بِٱللَّهِ
साथ अल्लाह के
then (it is) as though
فَكَأَنَّمَا
तो गोया कि
he had fallen
خَرَّ
वो गिर पड़ा
from
مِنَ
आसमान से
the sky
ٱلسَّمَآءِ
आसमान से
and (had) snatched him
فَتَخْطَفُهُ
फिर उचक लेते हैं उसे
the birds
ٱلطَّيْرُ
परिन्दे
or
أَوْ
या
had blown
تَهْوِى
गिरा देती है
him
بِهِ
उसे
the wind
ٱلرِّيحُ
हवा
to
فِى
किसी जगह में
a place
مَكَانٍ
किसी जगह में
far off
سَحِيقٍ
दूर दराज़ की

Hunafaa lillahi ghayra mushrikeena bihi waman yushrik biAllahi fakaannama kharra mina alssamai fatakhtafuhu alttayru aw tahwee bihi alrreehu fee makanin saheeqin (al-Ḥajj 22:31)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

इस तरह कि अल्लाह ही की ओर के होकर रहो। उसके साथ किसी को साझी न ठहराओ, क्योंकि जो कोई अल्लाह के साथ साझी ठहराता है तो मानो वह आकाश से गिर पड़ा। फिर चाहे उसे पक्षी उचक ले जाएँ या वायु उसे किसी दूरवर्ती स्थान पर फेंक दे

English Sahih:

Inclining [only] to Allah, not associating [anything] with Him. And he who associates with Allah – it is as though he had fallen from the sky and was snatched by the birds or the wind carried him down into a remote place. ([22] Al-Hajj : 31)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

निरे खरे अल्लाह के होकर (रहो) उसका किसी को शरीक न बनाओ और जिस शख्स ने (किसी को) खुदा का शरीक बनाया तो गोया कि वह आसमान से गिर पड़ा फिर उसको (या तो दरमियान ही से) कोई (मुरदा ख्ववार) चिड़िया उचक ले गई या उसे हवा के झोंके ने बहुत दूर जा फेंका