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وَيَوْمَ يُنَادِيْهِمْ فَيَقُوْلُ اَيْنَ شُرَكَاۤءِيَ الَّذِيْنَ كُنْتُمْ تَزْعُمُوْنَ   ( القصص: ٦٢ )

And (the) Day
وَيَوْمَ
और जिस दिन
He will call them
يُنَادِيهِمْ
वो पुकारेगा उन्हें
and say
فَيَقُولُ
फिर वो फ़रमायेगा
"Where
أَيْنَ
कहाँ हैं
(are) My partners
شُرَكَآءِىَ
शरीक मेरे
whom
ٱلَّذِينَ
वो जिनका
you used (to)
كُنتُمْ
थे तुम
claim?"
تَزْعُمُونَ
तुम गुमान रखते

Wayawma yunadeehim fayaqoolu ayna shurakaiya allatheena kuntum taz'umoona (al-Q̈aṣaṣ 28:62)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

ख़याल करो जिस दिन वह उन्हें पुकारेगा और कहेगा, 'कहाँ है मेरे वे साझीदार जिनका तुम्हें दावा था?'

English Sahih:

And [warn of] the Day He will call them and say, "Where are My 'partners' which you used to claim?" ([28] Al-Qasas : 62)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और जिस दिन ख़ुदा उन कुफ्फ़ार को पुकारेगा और पूछेगा कि जिनको तुम हमारा शरीक ख्याल करते थे वह (आज) कहाँ हैं (ग़रज़ वह शरीक भी बुलाँए जाएँगे)