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فَمَا كَانَ جَوَابَ قَوْمِهٖٓ اِلَّآ اَنْ قَالُوا اقْتُلُوْهُ اَوْ حَرِّقُوْهُ فَاَنْجٰىهُ اللّٰهُ مِنَ النَّارِۗ اِنَّ فِيْ ذٰلِكَ لَاٰيٰتٍ لِّقَوْمٍ يُّؤْمِنُوْنَ   ( العنكبوت: ٢٤ )

And not
فَمَا
तो ना
was
كَانَ
था
(the) answer
جَوَابَ
जवाब
(of) his people
قَوْمِهِۦٓ
उसकी क़ौम का
except
إِلَّآ
मगर
that
أَن
ये कि
they said
قَالُوا۟
उन्होंने कहा
"Kill him
ٱقْتُلُوهُ
क़त्ल कर दो उसे
or
أَوْ
या
burn him"
حَرِّقُوهُ
जला डालो उसे
But Allah saved him
فَأَنجَىٰهُ
तो निजात दी उसे
But Allah saved him
ٱللَّهُ
अल्लाह ने
from
مِنَ
आग से
the fire
ٱلنَّارِۚ
आग से
Indeed
إِنَّ
बेशक
in
فِى
इसमें
that
ذَٰلِكَ
इसमें
surely (are) Signs
لَءَايَٰتٍ
अलबत्ता निशानियाँ हैं
for a people
لِّقَوْمٍ
उन लोगों के लिए
who believe
يُؤْمِنُونَ
जो ईमान लाते हैं

Fama kana jawaba qawmihi illa an qaloo oqtuloohu aw harriqoohu faanjahu Allahu mina alnnari inna fee thalika laayatin liqawmin yuminoona (al-ʿAnkabūt 29:24)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

फिर उनकी क़ौम के लोगों का उत्तर इसके सिवा और कुछ न था कि उन्होंने कहा, 'मार डालो उसे या जला दो उसे!' अंततः अल्लाह ने उसको आग से बचा लिया। निश्चय ही इसमें उन लोगों के लिए निशानियाँ है, जो ईमान लाएँ

English Sahih:

And the answer of his [i.e., Abraham's] people was not but that they said, "Kill him or burn him," but Allah saved him from the fire. Indeed in that are signs for a people who believe. ([29] Al-'Ankabut : 24)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

ग़रज़ इबराहीम की क़ौम के पास (इन बातों का) इसके सिवा कोई जवाब न था कि बाहम कहने लगे इसको मार डालो या जला (कर ख़ाक) कर डालो (आख़िर वह कर गुज़रे) तो ख़ुदा ने उनको आग से बचा लिया इसमें शक नहीं कि दुनियादार लोगों के वास्ते इस वाकिये में (कुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं