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अल-अनकबूत आयत ८ | Al-Ankabut 29:8

And We have enjoined
وَوَصَّيْنَا
और ताकीद की हमने
(on) man
ٱلْإِنسَٰنَ
इन्सान को
goodness to his parents
بِوَٰلِدَيْهِ
अपने वालिदैन के साथ
goodness to his parents
حُسْنًاۖ
भलाई (करने) की
but if
وَإِن
और अगर
they both strive against you
جَٰهَدَاكَ
वो दोनों ज़ोर डालें तुम पर
to make you associate
لِتُشْرِكَ
ताकि तुम शरीक करो
with Me
بِى
मेरे साथ
what
مَا
उसको जो
not
لَيْسَ
नहीं है
you have
لَكَ
तुम्हें
of it
بِهِۦ
जिसका
any knowledge
عِلْمٌ
कोई इल्म
then (do) not
فَلَا
तो ना
obey both of them
تُطِعْهُمَآۚ
तुम इताअत करो उन दोनों की
To Me
إِلَىَّ
मेरी ही तरफ़
(is) your return
مَرْجِعُكُمْ
लौटना है तुम्हारा
and I will inform you
فَأُنَبِّئُكُم
तो मैं बताऊँगा तुम्हें
about what
بِمَا
वो जो
you used
كُنتُمْ
थे तुम
(to) do
تَعْمَلُونَ
तुम अमल किया करते

Wawassayna alinsana biwalidayhi husnan wain jahadaka litushrika bee ma laysa laka bihi 'ilmun fala tuti'huma ilayya marji'ukum faonabbiokum bima kuntum ta'maloona

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

और हमने मनुष्यों को अपने माँ-बाप के साथ अच्छा व्यवहार करने की ताकीद की है। किन्तु यदि वे तुमपर ज़ोर डालें कि तू किसी ऐसी चीज़ को मेरा साक्षी ठहराए, जिसका तुझे कोई ज्ञान नहीं, तो उनकी बात न मान। मेरी ही ओर तुम सबको पलटकर आना है, फिर मैं तुम्हें बता दूँगा जो कुछ कुम करते रहे होगे

English Sahih:

And We have enjoined upon man goodness to parents. But if they endeavor to make you associate with Me that of which you have no knowledge, do not obey them. To Me is your return, and I will inform you about what you used to do.

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और हमने इन्सान को अपने माँ बाप से अच्छा बरताव करने का हुक्म दिया है और (ये भी कि) अगर तुझे तेरे माँ बाप इस बात पर मजबूर करें कि ऐसी चीज़ को मेरा शरीक बना जिन (के शरीक होने) का मुझे इल्म तक नहीं तो उनका कहना न मानना तुम सबको (आख़िर एक दिन) मेरी तरफ लौट कर आना है मै जो कुछ तुम लोग (दुनिया में) करते थे बता दूँगा

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

और हमने निर्देश दिया मनुष्य को अपने माता-पिता के साथ उपकार करने[1] का और यदि दोनों दबाव डालें तुमपर कि तुम साझी बनाओ मेरे साथ उस चीज़ को, जिसका तुमको ज्ञान नहीं, तो उन दोनों की बात न मानो।[2] मेरी ओर ही तुम्हें फिरकर आना है, फिर मैं तुम्हें सूचित कर दूँगा उस कर्म से, जो तुम करते रहे हो।