Skip to main content

अन-निसा आयत १०४ | An-Nisa 4:104

And (do) not
وَلَا
और ना
be weak
تَهِنُوا۟
तुम कमज़ोरी दिखाओ
in
فِى
तलाश में
pursuit
ٱبْتِغَآءِ
तलाश में
(of) the people
ٱلْقَوْمِۖ
क़ौम की (दुश्मन)
If
إِن
अगर
you are
تَكُونُوا۟
हो तुम
suffering
تَأْلَمُونَ
तकलीफ़ उठाते
then indeed, they
فَإِنَّهُمْ
तो बेशक वो (भी)
are (also) suffering
يَأْلَمُونَ
वो तकलीफ़ उठाते हैं
like what
كَمَا
जैसा कि
you are suffering
تَأْلَمُونَۖ
तुम तकलीफ़ उठाते हो
while you (have) hope
وَتَرْجُونَ
और तुम उम्मीद रखते हो
from
مِنَ
अल्लाह से
Allah
ٱللَّهِ
अल्लाह से
what
مَا
उसकी जो
not
لَا
नहीं वो उम्मीद रखते
they hope
يَرْجُونَۗ
नहीं वो उम्मीद रखते
And is
وَكَانَ
और है
Allah
ٱللَّهُ
अल्लाह
All-Knowing
عَلِيمًا
बहुत इल्म वाला
All-Wise
حَكِيمًا
बहुत हिकमत वाला

Wala tahinoo fee ibtighai alqawmi in takoonoo talamoona fainnahum yalamoona kama talamoona watarjoona mina Allahi ma la yarjoona wakana Allahu 'aleeman hakeeman

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

और उन लोगों का पीछा करने में सुस्ती न दिखाओ। यदि तुम्हें दुख पहुँचता है; तो उन्हें भी दुख पहुँचता है, जिस तरह तुमको दुख पहुँचता है। और तुम अल्लाह से उस चीज़ की आशा करते हो, जिस चीज़ की वे आशा नहीं करते। अल्लाह तो सब कुछ जाननेवाला, तत्वदर्शी है

English Sahih:

And do not weaken in pursuit of the enemy. If you should be suffering – so are they suffering as you are suffering, but you expect from Allah that which they expect not. And Allah is ever Knowing and Wise.

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और (मुसलमानों) दुशमनों के पीछा करने में सुस्ती न करो अगर लड़ाई में तुमको तकलीफ़ पहुंचती है तो जैसी तुमको तकलीफ़ पहुंचती है उनको भी वैसी ही अज़ीयत होती है और (तुमको) ये भी (उम्मीद है कि) तुम ख़ुदा से वह वह उम्मीदें रखते हो जो (उनको) नसीब नहीं और ख़ुदा तो सबसे वाक़िफ़ (और) हिकमत वाला है

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

तथा तुम (शत्रु) जाति का पीछा करने में सिथिल न बनो, यदि तुम्हें दुःख पहुँचा है, तो तुम्हारे समान उन्हें भी दुःख पहुँचा है तथा तुम अल्लाह से जो आशा[1] रखते हो, वो आशा वे नहीं रखते तथा अल्लाह अति ज्ञानी तत्वज्ञ है।