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اِنَّمَا التَّوْبَةُ عَلَى اللّٰهِ لِلَّذِيْنَ يَعْمَلُوْنَ السُّوْۤءَ بِجَهَالَةٍ ثُمَّ يَتُوْبُوْنَ مِنْ قَرِيْبٍ فَاُولٰۤىِٕكَ يَتُوْبُ اللّٰهُ عَلَيْهِمْ ۗ وَكَانَ اللّٰهُ عَلِيْمًا حَكِيْمًا   ( النساء: ١٧ )

Only
إِنَّمَا
बेशक
the acceptance of repentance
ٱلتَّوْبَةُ
तौबा (क़ुबूल करना)
by
عَلَى
अल्लाह के ज़िम्मे है
Allah
ٱللَّهِ
अल्लाह के ज़िम्मे है
(is) for those who
لِلَّذِينَ
उनके लिए जो
do
يَعْمَلُونَ
अमल करते हैं
the evil
ٱلسُّوٓءَ
बुरा
in ignorance
بِجَهَٰلَةٍ
जहालत से
then
ثُمَّ
फिर
they repent
يَتُوبُونَ
वो तौबा कर लेते हैं
from
مِن
क़रीब से
soon after
قَرِيبٍ
क़रीब से
Then those
فَأُو۟لَٰٓئِكَ
तो यही वो लोग हैं
will have forgiveness
يَتُوبُ
मेहरबान होता है
(from) Allah
ٱللَّهُ
अल्लाह
upon them
عَلَيْهِمْۗ
उन पर
and is
وَكَانَ
और है
Allah
ٱللَّهُ
अल्लाह
All-Knowing
عَلِيمًا
बहुत इल्म वाला
All-Wise
حَكِيمًا
बहुत हिकमत वाला

Innama alttawbatu 'ala Allahi lillatheena ya'maloona alssooa bijahalatin thumma yatooboona min qareebin faolaika yatoobu Allahu 'alayhim wakana Allahu 'aleeman hakeeman (an-Nisāʾ 4:17)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

उन्ही लोगों की तौबा क़बूल करना अल्लाह के ज़िम्मे है जो भावनाओं में बह कर नादानी से कोई बुराई कर बैठे, फिर जल्द ही तौबा कर लें, ऐसे ही लोग है जिनकी तौबा अल्लाह क़बूल करता है। अल्लाह सब कुछ जाननेवाला, तत्वदर्शी है

English Sahih:

The repentance accepted by Allah is only for those who do wrong in ignorance [or carelessness] and then repent soon [after]. It is those to whom Allah will turn in forgiveness, and Allah is ever Knowing and Wise. ([4] An-Nisa : 17)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

मगर ख़ुदा की बारगाह में तौबा तो सिर्फ उन्हीं लोगों की (ठीक) है जो नादानिस्ता बुरी हरकत कर बैठे (और) फिर जल्दी से तौबा कर ले तो ख़ुदा भी ऐसे लोगों की तौबा क़ुबूल कर लेता है और ख़ुदा तो बड़ा जानने वाला हकीम है