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अल-मुमताहिना आयत १३ | Al-Mumtahanah 60:13

O you!
يَٰٓأَيُّهَا
ऐ लोगो जो
who!
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
believe!
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
(Do) not
لَا
ना तुम दोस्त बनाओ
make allies
تَتَوَلَّوْا۟
ना तुम दोस्त बनाओ
(of) a people
قَوْمًا
ऐसी क़ौम को
(The) wrath
غَضِبَ
नाराज़ हुआ
(of) Allah
ٱللَّهُ
अल्लाह
(is) upon them
عَلَيْهِمْ
जिन पर
Indeed
قَدْ
तहक़ीक़
they despair
يَئِسُوا۟
वो मायूस हो गए
of
مِنَ
आख़िरत से
the Hereafter
ٱلْءَاخِرَةِ
आख़िरत से
as
كَمَا
जैसा कि
despair
يَئِسَ
मायूस हुए
the disbelievers
ٱلْكُفَّارُ
काफ़िर
of
مِنْ
क़ब्रों वालों से
(the) companions
أَصْحَٰبِ
क़ब्रों वालों से
(of) the graves
ٱلْقُبُورِ
क़ब्रों वालों से

Ya ayyuha allatheena amanoo la tatawallaw qawman ghadiba Allahu 'alayhim qad yaisoo mina alakhirati kama yaisa alkuffaru min ashabi alquboori

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

ऐ ईमान लानेवालो! ऐसे लोगों से मित्रता न करो जिनपर अल्लाह का प्रकोप हुआ, वे आख़िरत से निराश हो चुके है, जिस प्रकार इनकार करनेवाले क़ब्रवालों से निराश हो चुके है

English Sahih:

O you who have believed, do not make allies of a people with whom Allah has become angry. They have despaired of [reward in] the Hereafter just as the disbelievers have despaired of [meeting] the companions [i.e., inhabitants] of the graves.

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

ऐ ईमानदारों जिन लोगों पर ख़ुदा ने अपना ग़ज़ब ढाया उनसे दोस्ती न करो (क्योंकि) जिस तरह काफ़िरों को मुर्दों (के दोबारा ज़िन्दा होने) की उम्मीद नहीं उसी तरह आख़ेरत से भी ये लोग न उम्मीद हैं

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

हे ईमान वालो! तुम उन लोगों को मित्र न बनाओ, क्रोधित हो गया है अल्लाह, जिनपर। वे निराश हो चुके हैं आख़िरत[1] (परलोक) से, उसी प्रकार, जैसे काफ़िर समाधियों में पड़े हुए लोगों (के जीवित होने) से निराश हैं।