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अल-अन्फाल आयत १ | Al-Anfal 8:1

They ask you
يَسْـَٔلُونَكَ
वो सवाल करते हैं आप से
about
عَنِ
ग़नीमतों के बारे में
the spoils of war
ٱلْأَنفَالِۖ
ग़नीमतों के बारे में
Say
قُلِ
कह दीजिए
"The spoils of war
ٱلْأَنفَالُ
ग़नीमतें
(are) for Allah
لِلَّهِ
अल्लाह के लिए
and the Messenger
وَٱلرَّسُولِۖ
और रसूल के लिए हैं
So fear
فَٱتَّقُوا۟
पस डरो
Allah
ٱللَّهَ
अल्लाह से
and set right
وَأَصْلِحُوا۟
और इस्लाह करो
that
ذَاتَ
आपस में
(which is) between you
بَيْنِكُمْۖ
आपस में
and obey
وَأَطِيعُوا۟
और इताअत करो
Allah
ٱللَّهَ
अल्लाह की
and His Messenger
وَرَسُولَهُۥٓ
और उसके रसूल की
if
إِن
अगर
you are
كُنتُم
हो तुम
believers"
مُّؤْمِنِينَ
ईमान लाने वाले

Yasaloonaka 'ani alanfali quli alanfalu lillahi waalrrasooli faittaqoo Allaha waaslihoo thata baynikum waatee'oo Allaha warasoolahu in kuntum mumineena

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

वे तुमसे ग़नीमतों के विषय में पूछते है। कहो, 'ग़नीमतें अल्लाह और रसूल की है। अतः अल्लाह का डर रखों और आपस के सम्बन्धों को ठीक रखो। और, अल्लाह और उसके रसूल की आज्ञा का पालन करो, यदि तुम ईमानवाले हो

English Sahih:

They ask you, [O Muhammad], about the bounties [of war]. Say, "The [decision concerning] bounties is for Allah and the Messenger." So fear Allah and amend that which is between you and obey Allah and His Messenger, if you should be believers.

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

(ऐ रसूल) तुम से लोग अनफाल (माले ग़नीमत) के बारे में पूछा करते हैं तुम कह दो कि अनफाल मख़सूस ख़ुदा और रसूल के वास्ते है तो ख़ुदा से डरो (और) अपने बाहमी (आपसी) मामलात की इसलाह करो और अगर तुम सच्चे (ईमानदार) हो तो ख़ुदा की और उसके रसूल की इताअत करो

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

(हे नबी!) आपसे (आपके साथी) युध्द में प्राप्त धन के विषय में प्रश्न कर रहे हैं। कह दें कि यूध्द में प्राप्त धन अल्लाह और रसूल के हैं। अतः अल्लाह से डरो और आपस में सुधार रखो तथा अल्लाह और उसके रसूल के आज्ञाकारी रहो[1] यदि तुम ईमान वाले हो।