Skip to main content

بَرَاۤءَةٌ مِّنَ اللّٰهِ وَرَسُوْلِهٖٓ اِلَى الَّذِيْنَ عَاهَدْتُّمْ مِّنَ الْمُشْرِكِيْنَۗ  ( التوبة: ١ )

Freedom from obligations
بَرَآءَةٌ
بَرَآءَةٌ है (ऐलान)
from
مِّنَ
अल्लाह की तरफ़ से
Allah
ٱللَّهِ
अल्लाह की तरफ़ से
and His Messenger
وَرَسُولِهِۦٓ
और उसके रसूल (की तरफ़ से)
to
إِلَى
तरफ़ उनके जिनसे
those (with) whom
ٱلَّذِينَ
तरफ़ उनके जिनसे
you made a treaty
عَٰهَدتُّم
मुआहिदा किया तुमने
from
مِّنَ
मुशरिकीन में से
the polytheists
ٱلْمُشْرِكِينَ
मुशरिकीन में से

Baraatun mina Allahi warasoolihi ila allatheena 'ahadtum mina almushrikeena (at-Tawbah 9:1)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

मुशरिकों (बहुदेववादियों) से जिनसे तुमने संधि की थी, विरक्ति (की उद्घॊषणा) है अल्लाह और उसके रसूल की ओर से

English Sahih:

[This is a declaration of] disassociation, from Allah and His Messenger, to those with whom you had made a treaty among the polytheists. ([9] At-Tawbah : 1)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

(ऐ मुसलमानों) जिन मुशरिकों से तुम लोगों ने सुलह का एहद किया था अब ख़ुदा और उसके रसूल की तरफ से उनसे (एक दम) बेज़ारी है