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अत-तौबा आयत २ | At-Taubah 9:2

So move about
فَسِيحُوا۟
पस चलो फिरो तुम
in
فِى
ज़मीन में
the land
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में
(during) four
أَرْبَعَةَ
चार
months
أَشْهُرٍ
महीने
but know
وَٱعْلَمُوٓا۟
और जान लो
that you
أَنَّكُمْ
बेशक तुम
(can) not
غَيْرُ
नहीं
escape
مُعْجِزِى
आजिज़ करने वाले
Allah
ٱللَّهِۙ
अल्लाह को
and that
وَأَنَّ
और बेशक
Allah
ٱللَّهَ
अल्लाह
(is) the One Who (will) disgrace
مُخْزِى
रुस्वा करने वाला है
the disbelievers
ٱلْكَٰفِرِينَ
काफ़िरों को

Faseehoo fee alardi arba'ata ashhurin wai'lamoo annakum ghayru mu'jizee Allahi waanna Allaha mukhzee alkafireena

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

'अतः इस धरती में चार महीने और चल-फिर लो और यह बात जान लो कि अल्लाह के क़ाबू से बाहर नहीं जा सकते और यह कि अल्लाह इनकार करनेवालों को अपमानित करता है।'

English Sahih:

So travel freely, [O disbelievers], throughout the land [during] four months but know that you cannot cause failure to Allah and that Allah will disgrace the disbelievers.

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

तो (ऐ मुशरिकों) बस तुम चार महीने (ज़ीकादा, जिल हिज्जा, मुहर्रम रजब) तो (चैन से बेख़तर) रूए ज़मीन में सैरो सियाहत (घूम फिर) कर लो और ये समझते रहे कि तुम (किसी तरह) ख़ुदा को आजिज़ नहीं कर सकते और ये भी कि ख़ुदा काफ़िरों को ज़रूर रूसवा करके रहेगा

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

तो (हे कीफ़िरो!) तुम धरती में चार महीने (स्वतंत्र होकर) फिरो तथा जान लो कि तुम अल्लाह को विवश नहीं कर सकोगे और निश्चय अल्लाह, काफ़िरों को अपमानित करने वाला है।