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अत-तौबा आयत ११३ | At-Taubah 9:113

Not
مَا
नहीं
(it) is
كَانَ
है (लायक़)
for the Prophet
لِلنَّبِىِّ
नबी के
and those who
وَٱلَّذِينَ
और उनके
believe
ءَامَنُوٓا۟
जो ईमान लाए
that
أَن
कि
they ask forgiveness
يَسْتَغْفِرُوا۟
वो बख़्शिश माँगें
for the polytheists
لِلْمُشْرِكِينَ
मुशरिकीन के लिए
even though
وَلَوْ
और अगरचे
they be
كَانُوٓا۟
हों वो
near of kin
أُو۟لِى
क़राबत वाले
near of kin
قُرْبَىٰ
क़राबत वाले
after
مِنۢ
बाद इसके
after
بَعْدِ
बाद इसके
[what]
مَا
जो
has become clear
تَبَيَّنَ
वाज़ेह हो गया
to them
لَهُمْ
उनके लिए
that they
أَنَّهُمْ
कि बेशक वो
(are the) companions
أَصْحَٰبُ
साथी हैं
(of) the Hellfire
ٱلْجَحِيمِ
जहन्नम के

Ma kana lilnnabiyyi waallatheena amanoo an yastaghfiroo lilmushrikeena walaw kanoo olee qurba min ba'di ma tabayyana lahum annahum ashabu aljaheemi

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

नबी और ईमान लानेवालों के लिए उचित नहीं कि वे बहुदेववादियों के लिए क्षमा की प्रार्थना करें, यद्यपि वे उसके नातेदार ही क्यों न हो, जबकि उनपर यह बात खुल चुकी है कि वे भड़कती आगवाले हैं

English Sahih:

It is not for the Prophet and those who have believed to ask forgiveness for the polytheists, even if they were relatives, after it has become clear to them that they are companions of Hellfire.

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

नबी और मोमिनीन पर जब ज़ाहिर हो चुका कि मुशरेकीन जहन्नुमी है तो उसके बाद मुनासिब नहीं कि उनके लिए मग़फिरत की दुआएं माँगें अगरचे वह मुशरेकीन उनके क़राबतदार हो (क्यों न) हो

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

किसी नबी तथा[1] उनके लिए जो ईमान लाये हों, योग्य नहीं है कि मुश्रिकों (मिश्रणवादियों) के लिए क्षमा की प्रार्थना करें। यद्यपि वे उनके समीपवर्ती हों, जब ये उजागर हो गया कि वास्तव में, वह नारकी[2] हैं।