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اِلَّا الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا وَعَمِلُوا الصّٰلِحٰتِ وَتَوَاصَوْا بِالْحَقِّ ەۙ وَتَوَاصَوْا بِالصَّبْرِ ࣖ  ( العصر: ٣ )

Except
إِلَّا
सिवाए
those who
ٱلَّذِينَ
उन लोगों के जो
believe
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
and do
وَعَمِلُوا۟
और उन्होंने अमल किए
righteous deeds
ٱلصَّٰلِحَٰتِ
नेक
and enjoin each other
وَتَوَاصَوْا۟
और एक दूसरे तो तलक़ीन की
to the truth
بِٱلْحَقِّ
हक़ की
and enjoin each other
وَتَوَاصَوْا۟
और एक दूसरे को तलक़ीन की
to [the] patience
بِٱلصَّبْرِ
सब्र की

Illa allatheena amanoo wa'amiloo alssalihati watawasaw bialhaqqi watawasaw bialssabri (al-ʿAṣr 103:3)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

सिवाय उन लोगों के जो ईमान लाए और अच्छे कर्म किए और एक-दूसरे को हक़ की ताकीद की, और एक-दूसरे को धैर्य की ताकीद की

English Sahih:

Except for those who have believed and done righteous deeds and advised each other to truth and advised each other to patience. ([103] Al-'Asr : 3)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

मगर जो लोग ईमान लाए, और अच्छे काम करते रहे और आपस में हक़ का हुक्म और सब्र की वसीयत करते रहे