Skip to main content
He said
قَالَ
उसने कहा
"O my people!
يَٰقَوْمِ
ऐ मेरी क़ौम
Do you see
أَرَءَيْتُمْ
क्या देखा तुमने
if
إِن
अगर
I am
كُنتُ
हूँ मैं
on
عَلَىٰ
एक वाज़ेह दलील पर
a clear evidence
بَيِّنَةٍ
एक वाज़ेह दलील पर
from
مِّن
अपने रब की तरफ़ से
my Lord
رَّبِّى
अपने रब की तरफ़ से
and He has provided me
وَرَزَقَنِى
और उसने दिया हो मुझे
from Himself
مِنْهُ
अपने पास से
a good provision?
رِزْقًا
रिज़्क़
a good provision?
حَسَنًاۚ
अच्छा
And not
وَمَآ
और नहीं
I intend
أُرِيدُ
मैं चाहता
that
أَنْ
कि
I differ from you
أُخَالِفَكُمْ
मैं मुख़ालफ़त करुँ तुम्हारी
in
إِلَىٰ
तरफ़
what
مَآ
उसके जो
I forbid you
أَنْهَىٰكُمْ
मैं रोकता हूँ तुम्हें
from it
عَنْهُۚ
जिस से
Not
إِنْ
नहीं
I intend
أُرِيدُ
मैं चाहता
except
إِلَّا
मगर
the reform
ٱلْإِصْلَٰحَ
इस्लाह
as much as I am able
مَا
जितनी
as much as I am able
ٱسْتَطَعْتُۚ
मैं इस्तिताअत रखता हूँ
And not
وَمَا
और नहीं
(is) my success
تَوْفِيقِىٓ
तौफ़ीक़ मेरी
except
إِلَّا
मगर
with Allah
بِٱللَّهِۚ
साथ अल्लाह के
Upon Him
عَلَيْهِ
उसी पर
I trust
تَوَكَّلْتُ
तवक्कल किया मैंने
and to Him
وَإِلَيْهِ
और उसी की तरफ़
I turn
أُنِيبُ
मैं रुजूअ करता हूँ

Qala ya qawmi araaytum in kuntu 'ala bayyinatin min rabbee warazaqanee minhu rizqan hasanan wama oreedu an okhalifakum ila ma anhakum 'anhu in oreedu illa alislaha ma istata'tu wama tawfeeqee illa biAllahi 'alayhi tawakkaltu wailayhi oneebu

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

उसने कहा, 'ऐ मेरी क़ौम के लोगो! तुम्हारा क्या विचार है? यदि मैं अपने रब के एक स्पष्ट प्रमाण पर हूँ और उसने मुझे अपनी ओर से अच्छी आजीविका भी प्रदान की (तो झुठलाना मेरे लिए कितना हानिकारक होगा!) और मैं नहीं चाहता कि जिन बातों से मैं तुम्हें रोकता हूँ स्वयं स्वयं तुम्हारे विपरीत उनको करने लगूँ। मैं तो अपने बस भर केवल सुधार चाहता हूँ। मेरा काम बनना तो अल्लाह ही की सहायता से सम्भव है। उसी पर मेरा भरोसा है और उसी की ओर मैं रुजू करता हूँ

English Sahih:

He said, "O my people, have you considered: if I am upon clear evidence from my Lord and He has provided me with a good provision from Him...? And I do not intend to differ from you in that which I have forbidden you; I only intend reform as much as I am able. And my success is not but through Allah. Upon Him I have relied, and to Him I return.

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

शुएब ने कहा ऐ मेरी क़ौम अगर मै अपने परवरदिगार की तरफ से रौशन दलील पर हूँ और उसने मुझे (हलाल) रोज़ी खाने को दी है (तो मै भी तुम्हारी तरह हराम खाने लगूँ) और मै तो ये नहीं चाहता कि जिस काम से तुम को रोकूँ तुम्हारे बर ख़िलाफ (बदले) आप उसको करने लगूं मैं तो जहाँ तक मुझे बन पड़े इसलाह (भलाई) के सिवा (कुछ और) चाहता ही नहीं और मेरी ताईद तो ख़ुदा के सिवा और किसी से हो ही नहीं सकती इस पर मैने भरोसा कर लिया है और उसी की तरफ रुज़ू करता हूँ

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

शोऐब ने कहाः हे मेरी जाति के लोगो! तुम बताओ, यदि मैं अपने पालनहार की ओर से प्रत्यक्ष प्रमाण पर हूँ और उसने मुझे अच्छी जीविका प्रदान की हो, (तो कैसे तुम्हारा साथ दूँ?) मैं नहीं चाहता कि उसके विरुध्द करूँ, जिससे तुम्हें रोक रहा हूँ। मैं जहाँ तक हो सके, सुधार ही चाहता हूँ और ये जो कुछ करना चाहता हूँ, अल्लाह के योगदान पर निर्भर करता है। मैंने उसीपर भरोसा किया है और उसी की ओर ध्यानमग्न रहता हूँ।