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كُلُوْا مِنْ طَيِّبٰتِ مَا رَزَقْنٰكُمْۙ وَلَا تَطْغَوْا فِيْهِ فَيَحِلَّ عَلَيْكُمْ غَضَبِيْۚ وَمَنْ يَّحْلِلْ عَلَيْهِ غَضَبِيْ فَقَدْ هَوٰى   ( طه: ٨١ )

Eat
كُلُوا۟
खाओ
of
مِن
पाकीज़ा चीज़ों में से
(the) good things
طَيِّبَٰتِ
पाकीज़ा चीज़ों में से
which
مَا
जो
We have provided you
رَزَقْنَٰكُمْ
रिज़्क़ दिया हमने तुम्हें
and (do) not
وَلَا
और ना
transgress
تَطْغَوْا۟
तुम सरकशी करो
therein
فِيهِ
इसमें
lest should descend
فَيَحِلَّ
वरना उतरेगा
upon you
عَلَيْكُمْ
तुम पर
My Anger
غَضَبِىۖ
ग़ज़ब मेरा
And whoever
وَمَن
और वो जो
on whom descends
يَحْلِلْ
उतरे
on whom descends
عَلَيْهِ
जिस पर
My Anger
غَضَبِى
ग़ज़ब मेरा
indeed
فَقَدْ
तो तहक़ीक़
he (has) perished
هَوَىٰ
वो हलाक हो गया

Kuloo min tayyibati ma razaqnakum wala tatghaw feehi fayahilla 'alaykum ghadabee waman yahlil 'alayhi ghadabee faqad hawa (Ṭāʾ Hāʾ 20:81)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

'खाओ, जो कुछ पाक अच्छी चीज़े हमने तुम्हें प्रदान की है, किन्तु इसमें हद से आगे न बढ़ो कि तुमपर मेरा प्रकोप टूट पड़े और जिस किसी पर मेरा प्रकोप टूटा, वह तो गिरकर ही रहा

English Sahih:

[Saying], "Eat from the good things with which We have provided you and do not transgress [or oppress others] therein, lest My anger should descend upon you. And he upon whom My anger descends has certainly fallen [i.e., perished]." ([20] Taha : 81)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और (फ़रमाया) कि हमने जो पाक व पाक़ीज़ा रोज़ी तुम्हें दे रखी है उसमें से खाओ (पियो) और उसमें (किसी क़िस्म की) शरारत न करो वरना तुम पर मेरा अज़ाब नाज़िल हो जाएगा और (याद रखो कि) जिस पर मेरा ग़ज़ब नाज़िल हुआ तो वह यक़ीनन गुमराह (हलाक) हुआ