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وَكَاَيِّنْ مِّنْ دَاۤبَّةٍ لَّا تَحْمِلُ رِزْقَهَاۖ اللّٰهُ يَرْزُقُهَا وَاِيَّاكُمْ وَهُوَ السَّمِيْعُ الْعَلِيْمُ  ( العنكبوت: ٦٠ )

And how many
وَكَأَيِّن
और कितने ही
of
مِّن
जानदार हैं
a creature
دَآبَّةٍ
जानदार हैं
(does) not
لَّا
नहीं वो उठाते
carry
تَحْمِلُ
नहीं वो उठाते
its provision
رِزْقَهَا
रिज़्क़ अपना
Allah
ٱللَّهُ
अल्लाह
provides (for) it
يَرْزُقُهَا
रिज़्क़ देता है उन्हें
and (for) you
وَإِيَّاكُمْۚ
और तुम्हें भी
And He
وَهُوَ
और वो ही है
(is) the All-Hearer
ٱلسَّمِيعُ
ख़ूब सुनने वाला
the All-Knower
ٱلْعَلِيمُ
ख़ूब जानने वाला

Wakaayyin min dabbatin la tahmilu rizqaha Allahu yarzuquha waiyyakum wahuwa alssamee'u al'aleemu (al-ʿAnkabūt 29:60)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

कितने ही चलनेवाले जीवधारी है, जो अपनी रोज़ी उठाए नहीं फिरते। अल्लाह ही उन्हें रोज़ी देता है और तुम्हें भी! वह सब कुछ सुनता, जानता है

English Sahih:

And how many a creature carries not its [own] provision. Allah provides for it and for you. And He is the Hearing, the Knowing. ([29] Al-'Ankabut : 60)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और ज़मीन पर चलने वालों में बहुतेरे ऐसे हैं जो अपनी रोज़ी अपने ऊपर लादे नहीं फिरते ख़ुदा ही उनको भी रोज़ी देता है और तुम को भी और वह बड़ा सुनने वाला वाक़िफकार है