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وَمَآ اَنْتَ بِهٰدِ الْعُمْيِ عَنْ ضَلٰلَتِهِمْۗ اِنْ تُسْمِعُ اِلَّا مَنْ يُّؤْمِنُ بِاٰيٰتِنَا فَهُمْ مُّسْلِمُوْنَ ࣖ  ( الروم: ٥٣ )

And not
وَمَآ
और नहीं
you
أَنتَ
आप
can guide
بِهَٰدِ
हिदायत देने वाले
the blind
ٱلْعُمْىِ
अँधों को
from
عَن
उनकी गुमराही से
their error
ضَلَٰلَتِهِمْۖ
उनकी गुमराही से
Not
إِن
नहीं
you can make hear
تُسْمِعُ
आप सुन सकते हैं
except
إِلَّا
मगर
(those) who
مَن
उसे जो
believe
يُؤْمِنُ
ईमान रखता हो
in Our Verses
بِـَٔايَٰتِنَا
हमारी आयात पर
so they
فَهُم
फिर वो
surrender
مُّسْلِمُونَ
फ़रमाबरदार हों

Wama anta bihadi al'umyi 'an dalalatihim in tusmi'u illa man yuminu biayatina fahum muslimoona (ar-Rūm 30:53)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

और न तुम अंधों को उनकी गुमराही से फेरकर मार्ग पर ला सकते हो। तुम तो केवल उन्हीं को सुना सकते हो जो हमारी आयतों पर ईमान लाएँ। तो वही आज्ञाकारी हैं

English Sahih:

And you cannot guide the blind away from their error. You will only make hear those who believe in Our verses so they are Muslims [in submission to Allah]. ([30] Ar-Rum : 53)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और न तुम अंधों को उनकी गुमराही से (फेरकर) राह पर ला सकते हो तो तुम तो बस उन्हीं लोगों को सुना (समझा) सकते हो जो हमारी आयतों को दिल से मानें फिर यही लोग इस्लाम लाने वाले हैं