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लुकमान आयत १६ | Luqman 31:16

"O my son!
يَٰبُنَىَّ
ऐ मेरे बेटे
Indeed it
إِنَّهَآ
बेशक वो
if
إِن
अगर
it be
تَكُ
हो वो(शै)
(the) weight
مِثْقَالَ
वज़न बराबर
(of) a grain
حَبَّةٍ
दाने
of
مِّنْ
राई के
a mustard seed
خَرْدَلٍ
राई के
and it be
فَتَكُن
फिर वो हो
in
فِى
किसी चट्टान में
a rock
صَخْرَةٍ
किसी चट्टान में
or
أَوْ
या
in
فِى
आसमानों में
the heavens
ٱلسَّمَٰوَٰتِ
आसमानों में
or
أَوْ
या
in
فِى
ज़मीन में
the earth
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन में
Allah will bring it forth
يَأْتِ
ले आएगा
Allah will bring it forth
بِهَا
उसे
Allah will bring it forth
ٱللَّهُۚ
अल्लाह
Indeed
إِنَّ
बेशक
Allah
ٱللَّهَ
अल्लाह
(is) All-Subtle
لَطِيفٌ
बहुत बारीकबीन है
All-Aware
خَبِيرٌ
ख़ूब बाख़बर है

Ya bunayya innaha in taku mithqala habbatin min khardalin fatakun fee sakhratin aw fee alssamawati aw fee alardi yati biha Allahu inna Allaha lateefun khabeerun

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

'ऐ मेरे बेटे! इसमें सन्देह नहीं कि यदि वह राई के दाने के बराबर भी हो, फिर वह किसी चट्टान के बीच हो या आकाशों में हो या धरती में हो, अल्लाह उसे ला उपस्थित करेगा। निस्संदेह अल्लाह अत्यन्त सूक्ष्मदर्शी, ख़बर रखनेवाला है।

English Sahih:

[And Luqman said], "O my son, indeed if it [i.e., a wrong] should be the weight of a mustard seed and should be within a rock or [anywhere] in the heavens or in the earth, Allah will bring it forth. Indeed, Allah is Subtle and Aware.

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

(उस वक्त उसका अन्जाम) बता दूँगा ऐ बेटा इसमें शक नहीं कि वह अमल (अच्छा हो या बुरा) अगर राई के बराबर भी हो और फिर वह किसी सख्त पत्थर के अन्दर या आसमान में या ज़मीन मे (छुपा हुआ) हो तो भी ख़ुदा उसे (क़यामत के दिन) हाज़िर कर देगा बेशक ख़ुदा बड़ा बारीकबीन वाक़िफकार है

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

हे मेरे पुत्र! यदि (हो कोई कर्म) राई के दाने के बराबर, फिर वह यदि हो किसी पत्थर के भीतर, आकाशों में या धरती में, तो उसे भी उपस्थित करेगा[1] अल्लाह। वास्तव में, वह, सब महीन बातों से सूचित है।