Skip to main content
And to Sulaiman
وَلِسُلَيْمَٰنَ
और सुलैमान के लिए
the wind
ٱلرِّيحَ
हवा को(मुसख़्खर किया)
its morning course
غُدُوُّهَا
सुबह का चलना उसका
(was) a month
شَهْرٌ
एक माह का
and its afternoon course
وَرَوَاحُهَا
और शाम का चलना उसका
(was) a month
شَهْرٌۖ
एक माह का
and We caused to flow
وَأَسَلْنَا
और बहा दिया हमने
for him
لَهُۥ
उसके लिए
a spring
عَيْنَ
चश्मा
(of) molten copper
ٱلْقِطْرِۖ
पिघले हुए ताँबे का
And [of]
وَمِنَ
और जिन्नों में से
the jinn
ٱلْجِنِّ
और जिन्नों में से
who
مَن
जो
worked
يَعْمَلُ
काम करते थे
before him
بَيْنَ
उसके सामने
before him
يَدَيْهِ
उसके सामने
by the permission
بِإِذْنِ
इज़्न से
(of) his Lord
رَبِّهِۦۖ
उसके रब के
And whoever
وَمَن
और जो
deviated
يَزِغْ
सरकशी करता
among them
مِنْهُمْ
उनमें से
from
عَنْ
हमारे हुक्म से
Our Command
أَمْرِنَا
हमारे हुक्म से
We will make him taste
نُذِقْهُ
हम चखाते उसे
of
مِنْ
अज़ाब से
(the) punishment
عَذَابِ
अज़ाब से
(of) the Blaze
ٱلسَّعِيرِ
भड़कती हुई आग के

Walisulaymana alrreeha ghuduwwuha shahrun warawahuha shahrun waasalna lahu 'ayna alqitri wamina aljinni man ya'malu bayna yadayhi biithni rabbihi waman yazigh minhum 'an amrina nuthiqhu min 'athabi alssa'eeri

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

और सुलैमान के लिए वायु को वशीभुत कर दिया था। प्रातः समय उसका चलना एक महीने की राह तक और सायंकाल को उसका चलना एक महीने की राह तक - और हमने उसके लिए पिघले हुए ताँबे का स्रोत बहा दिया - और जिन्नों में से भी कुछ को (उसके वशीभूत कर दिया था,) जो अपने रब की अनुज्ञा से उसके आगे काम करते थे। (हमारा आदेशा था,) 'उनमें से जो हमारे हुक्म से फिरेगा उसे हम भडकती आग का मज़ा चखाएँगे।'

English Sahih:

And to Solomon [We subjected] the wind – its morning [journey was that of] a month – and its afternoon [journey was that of] a month, and We made flow for him a spring of [liquid] copper. And among the jinn were those who worked for him by the permission of his Lord. And whoever deviated among them from Our command – We will make him taste of the punishment of the Blaze.

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और हवा को सुलेमान का (ताबेइदार बना दिया था) कि उसकी सुबह की रफ्तार एक महीने (मुसाफ़त) की थी और इसी तरह उसकी शाम की रफ्तार एक महीने (के मुसाफत) की थी और हमने उनके लिए तांबे (को पिघलाकर) उसका चश्मा जारी कर दिया था और जिन्नात (को उनका ताबेदार कर दिया था कि उन) में कुछ लोग उनके परवरदिगार के हुक्म से उनके सामने काम काज करते थे और उनमें से जिसने हमारे हुक्म से इनहराफ़ किया है उसे हम (क़यामत में) जहन्नुम के अज़ाब का मज़ा चख़ाँएगे

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

तथा ( हमने वश में कर दिया) सुलैमान[1] के लिए वायु को। उसका प्रातः चलना एक महीने का तथा संध्या का चलना एक महीने का[2] होता था तथा हमने बहा दिये उसके लिए तांबे के स्रोत तथा कुछ जिन्न कार्यरत थे उसके समक्ष, उसके पालनहार की अनुमति से तथा उनमें से जो फिरेगा हमारे आदेश से, तो हम चखायेंगे[3] उसे भड़कती अग्नि की यातना।