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अल-गाफिर आयत ५६ | Al-Ghafir 40:56

Indeed
إِنَّ
बेशक
those who
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
dispute
يُجَٰدِلُونَ
झगड़ते हैं
concerning
فِىٓ
आयात में
(the) Signs
ءَايَٰتِ
आयात में
(of) Allah
ٱللَّهِ
अल्लाह की
without
بِغَيْرِ
बग़ैर
any authority
سُلْطَٰنٍ
किसी दलील के
(which) came to them
أَتَىٰهُمْۙ
जो आई हो उनके पास
not
إِن
नहीं
(is) in
فِى
उनके सीनों में
their breasts
صُدُورِهِمْ
उनके सीनों में
but
إِلَّا
मगर
greatness
كِبْرٌ
बड़ाई
not
مَّا
नहीं
they
هُم
वो
(can) reach it
بِبَٰلِغِيهِۚ
पहुँचने वाले उसे
So seek refuge
فَٱسْتَعِذْ
पस पनाह तलब कीजिए
in Allah
بِٱللَّهِۖ
अल्लाह की
Indeed He
إِنَّهُۥ
बेशक वो
He
هُوَ
वो ही है
(is) the All-Hearer
ٱلسَّمِيعُ
ख़ूब सुनने वाला
the All-Seer
ٱلْبَصِيرُ
ख़ूब देखने वाला

Inna allatheena yujadiloona fee ayati Allahi bighayri sultanin atahum in fee sudoorihim illa kibrun ma hum bibaligheehi faista'ith biAllahi innahu huwa alssamee'u albaseeru

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

जो लोग बिना किसी ऐसे प्रमाण के जो उनके पास आया हो अल्लाह की आयतों में झगड़ते है उनके सीनों में केवल अहंकार है जिसतक वे पहुँचनेवाले नहीं। अतः अल्लाह की शरण लो। निश्चय ही वह सुनता, देखता है

English Sahih:

Indeed, those who dispute concerning the signs of Allah without [any] evidence having come to them – there is not within their breasts except pride, [the extent of] which they cannot reach. So seek refuge in Allah. Indeed, it is He who is the Hearing, the Seeing.

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

जिन लोगों के पास (ख़ुदा की तरफ से) कोई दलील तो आयी नहीं और (फिर) वह ख़ुदा की आयतों में (ख्वाह मा ख्वाह) झगड़े निकालते हैं, उनके दिल में बुराई (की बेजां हवस) के सिवा कुछ नहीं हालाँकि वह लोग उस तक कभी पहुँचने वाले नहीं तो तुम बस ख़ुदा की पनाह माँगते रहो बेशक वह बड़ा सुनने वाला (और) देखने वाला है

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

वास्तव में, जो झगड़ते हैं अल्लाह की आयतों में, बिना किसी प्रमाण के, जो आया[1] हो उनके पास, तो उनके दिलों में बड़ाई के सिवा कुछ नहीं है, जिस तक वे पहुचने वाले नहीं हैं। अतः, आप अल्लाह की शरण लें। वास्तव में, वही सब कुछ सुनने-जानने वाला है।