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अल-जाथीया आयत ३२ | Al-Jathiya 45:32

And when
وَإِذَا
और जब
it was said
قِيلَ
कहा गया
"indeed
إِنَّ
बेशक
(the) Promise
وَعْدَ
वादा
(of) Allah
ٱللَّهِ
अल्लाह का
(is) true
حَقٌّ
सच्चा है
and the Hour -
وَٱلسَّاعَةُ
और क़यामत
(there is) no
لَا
नहीं कोई शक
doubt
رَيْبَ
नहीं कोई शक
about it
فِيهَا
उसमें
you said
قُلْتُم
कहा तुमने
"Not
مَّا
नहीं
we know
نَدْرِى
हम जानते
what
مَا
क्या है
the Hour (is)
ٱلسَّاعَةُ
क़यामत
Not
إِن
नहीं
we think
نَّظُنُّ
हम समझते
except
إِلَّا
मगर
an assumption
ظَنًّا
एक गुमान ही
and not
وَمَا
और नहीं हैं
we
نَحْنُ
हम
(are) convinced"
بِمُسْتَيْقِنِينَ
यक़ीन करने वाले

Waitha qeela inna wa'da Allahi haqqun waalssa'atu la rayba feeha qultum ma nadree ma alssa'atu in nathunnu illa thannan wama nahnu bimustayqineena

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

और जब कहा जाता था कि अल्लाह का वादा सच्चा है और (क़ियामत की) घड़ी में कोई संदेह नहीं हैं। तो तुम कहते थे, 'हम नहीं जानते कि वह घड़ी क्या हैं? तो तुम कहते थे, 'हम नहीं जानते कि वह घड़ी क्या है? हमें तो बस एक अनुमान-सा प्रतीत होता है और हमें विश्वास नहीं होता।''

English Sahih:

And when it was said, 'Indeed, the promise of Allah is truth and the Hour [is coming] – no doubt about it,' you said, 'We know not what is the Hour. We assume only assumption, and we are not convinced.'"

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और जब (तुम से) कहा जाता था कि ख़ुदा का वायदा सच्चा है और क़यामत (के आने) में कुछ शुबहा नहीं तो तुम कहते थे कि हम नहीं जानते कि क़यामत क्या चीज़ है हम तो बस (उसे) एक ख्याली बात समझते हैं और हम तो (उसका) यक़ीन नहीं रखते

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

तो जब कहा जाता था कि निश्चय अल्लाह का वचन सच है तथा प्रलय होने में तनिक भी संदेह नहीं, तो तुम कहते थे कि प्रलय क्या है? हम तो केवल एक अनुमान रखते हैं तथा हम विश्वास करने वाले नहीं हैं।