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نَحْنُ اَعْلَمُ بِمَا يَقُوْلُوْنَ وَمَآ اَنْتَ عَلَيْهِمْ بِجَبَّارٍۗ فَذَكِّرْ بِالْقُرْاٰنِ مَنْ يَّخَافُ وَعِيْدِ ࣖ   ( ق: ٤٥ )

We
نَّحْنُ
हम
know best
أَعْلَمُ
ज़्यादा जानते हैं
[of] what
بِمَا
उसे जो
they say
يَقُولُونَۖ
वो कहते हैं
and not
وَمَآ
और नहीं
(are) you
أَنتَ
आप
over them
عَلَيْهِم
उन पर
the one to compel
بِجَبَّارٍۖ
ज़बरदस्ती करने वाले
But remind
فَذَكِّرْ
पस नसीहत कीजिए
with the Quran
بِٱلْقُرْءَانِ
साथ क़ुरआन के
whoever
مَن
उसे जो
fears
يَخَافُ
डरता हो
My threat
وَعِيدِ
मेरी वईद से

Nahnu a'lamu bima yaqooloona wama anta 'alayhim bijabbarin fathakkir bialqurani man yakhafu wa'eedi (Q̈āf 50:45)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

हम जानते है जो कुछ वे कहते है, तुम उनपर कोई ज़बरदस्ती करनेवाले तो हो नहीं। अतः तुम क़ुरआन के द्वारा उसे नसीहत करो जो हमारी चेतावनी से डरे

English Sahih:

We are most knowing of what they say, and you are not over them a tyrant. But remind by the Quran whoever fears My threat. ([50] Qaf : 45)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और हम पर बहुत आसान है (ऐ रसूल) ये लोग जो कुछ कहते हैं हम (उसे) ख़ूब जानते हैं और तुम उन पर जब्र तो देते नहीं हो तो जो हमारे (अज़ाब के) वायदे से डरे उसको तुम क़ुरान के ज़रिए नसीहत करते रहो