Skip to main content

अल-हदीद आयत १३ | Al-Hadid 57:13

(On the) Day
يَوْمَ
जिस दिन
will say
يَقُولُ
कहेंगे
the hypocrite men
ٱلْمُنَٰفِقُونَ
मुनाफ़िक़ मर्द
and the hypocrite women
وَٱلْمُنَٰفِقَٰتُ
और मुनाफ़िक़ औरतें
to those who
لِلَّذِينَ
उन्हें जो
believed
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
"Wait for us
ٱنظُرُونَا
इन्तिज़ार करो हमारा
we may acquire
نَقْتَبِسْ
हम रौशनी हासिल करें
of
مِن
तुम्हारे नूर से
your light"
نُّورِكُمْ
तुम्हारे नूर से
It will be said
قِيلَ
कह दिया जाएगा
"Go back
ٱرْجِعُوا۟
लौट जाओ
behind you
وَرَآءَكُمْ
अपने पीछे
and seek
فَٱلْتَمِسُوا۟
फिर तलाश करो
light"
نُورًا
नूर को
Then will be put up
فَضُرِبَ
तो हाइल कर दी जाएगी
between them
بَيْنَهُم
दर्मियान उनके
a wall
بِسُورٍ
एक दीवार
for it
لَّهُۥ
उसका
a gate
بَابٌۢ
एक दरवाज़ा होगा
its interior
بَاطِنُهُۥ
उसकी अन्दरूनी जानिब
in it
فِيهِ
जिसमें
(is) mercy
ٱلرَّحْمَةُ
रहमत होगी
but its exterior
وَظَٰهِرُهُۥ
और उसकी बैरूनी जानिब
facing towards [it]
مِن
उस तरफ़ से
facing towards [it]
قِبَلِهِ
उस तरफ़ से
the punishment
ٱلْعَذَابُ
अज़ाब होगा

Yawma yaqoolu almunafiqoona waalmunafiqatu lillatheena amanoo onthuroona naqtabis min noorikum qeela irji'oo waraakum failtamisoo nooran faduriba baynahum bisoorin lahu babun batinuhu feehi alrrahmatu wathahiruhu min qibalihi al'athabu

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

जिस दिन कपटाचारी पुरुष और कपटाचारी स्त्रियाँ मोमिनों से कहेंगी, 'तनिक हमारी प्रतिक्षा करो। हम भी तुम्हारे प्रकाश मे से कुछ प्रकाश ले लें!' कहा जाएगा, 'अपने पीछे लौट जाओ। फिर प्रकाश तलाश करो!' इतने में उनके बीच एक दीवार खड़ी कर दी जाएगी, जिसमें एक द्वार होगा। उसके भीतर का हाल यह होगा कि उसमें दयालुता होगी और उसके बाहर का यह कि उस ओर से यातना होगी

English Sahih:

On the [same] Day the hypocrite men and hypocrite women will say to those who believed, "Wait for us that we may acquire some of your light." It will be said, "Go back behind you and seek light." And a wall will be placed between them with a door, its interior containing mercy, but on the outside of it is torment.

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

उस दिन मुनाफ़िक मर्द और मुनाफ़िक औरतें ईमानदारों से कहेंगे एक नज़र (शफ़क्क़त) हमारी तरफ़ भी करो कि हम भी तुम्हारे नूर से कुछ रौशनी हासिल करें तो (उनसे) कहा जाएगा कि तुम अपने पीछे (दुनिया में) लौट जाओ और (वही) किसी और नूर की तलाश करो फिर उनके बीच में एक दीवार खड़ी कर दी जाएगी जिसमें एक दरवाज़ा होगा (और) उसके अन्दर की जानिब तो रहमत है और बाहर की तरफ अज़ाब तो मुनाफ़िक़ीन मोमिनीन से पुकार कर कहेंगे

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

जिस दिन कहेंगे मुनाफ़िक़ पुरुष तथा मुनाफ़िक़ स्त्रियाँ उनसे, जो ईमान लाये कि हमारी प्रतीक्षा करो, हम प्राप्त कर लें तुम्हारे प्रकाश में से कुछ। उनसे कहा जायेगाः तुम पीछे वापस जाओ और प्रकाश की खोज करो।[1] फिर बना दी जायेगी उनके बीच एक दीवार, जिसमें एक द्वार होगा। उसके भीतर दया होगी तथा उसके बाहर यातना होगी।