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قُلْ مَنْ يُّنَجِّيْكُمْ مِّنْ ظُلُمٰتِ الْبَرِّ وَالْبَحْرِ تَدْعُوْنَهٗ تَضَرُّعًا وَّخُفْيَةً ۚ لَىِٕنْ اَنْجٰىنَا مِنْ هٰذِهٖ لَنَكُوْنَنَّ مِنَ الشّٰكِرِيْنَ   ( الأنعام: ٦٣ )

Say
قُلْ
कह दीजिए
"Who
مَن
कौन
saves you
يُنَجِّيكُم
निजात देता है तुम्हें
from
مِّن
अँधेरों से
darkness[es]
ظُلُمَٰتِ
अँधेरों से
(of) the land
ٱلْبَرِّ
खुश्की
and the sea
وَٱلْبَحْرِ
और समुन्दर के
you call Him
تَدْعُونَهُۥ
तुम पुकारते हो उसे
humbly
تَضَرُّعًا
गिड़-गिड़ा कर
and secretly
وَخُفْيَةً
और चुपके-चुपके
"If
لَّئِنْ
अलबत्ता अगर
He saves us
أَنجَىٰنَا
उसने निजात दी हमें
from
مِنْ
इससे
this
هَٰذِهِۦ
इससे
surely we will be
لَنَكُونَنَّ
अलबत्ता हम ज़रूर हो जाऐगे
from
مِنَ
शुक्र करने वालों में से
the grateful ones"
ٱلشَّٰكِرِينَ
शुक्र करने वालों में से

Qul man yunajjeekum min thulumati albarri waalbahri tad'oonahu tadarru'an wakhufyatan lain anjana min hathihi lanakoonanna mina alshshakireena (al-ʾAnʿām 6:63)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

कहो, 'कौन है जो थल और जल के अँधेरो से तुम्हे छुटकारा देता है, जिसे तुम गिड़गिड़ाते हुए और चुपके-चुपके पुकारने लगते हो कि यदि हमें इससे बचा लिया तो हम अवश्य की कृतज्ञ हो जाएँगे?'

English Sahih:

Say, "Who rescues you from the darknesses of the land and sea [when] you call upon Him imploring [aloud] and privately, 'If He should save us from this [crisis], we will surely be among the thankful.'" ([6] Al-An'am : 63)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

(ऐ रसूल) उनसे पूछो कि तुम ख़ुश्की और तरी के (घटाटोप) ऍधेरों से कौन छुटकारा देता है जिससे तुम गिड़ गिड़ाकर और (चुपके) दुआएं मॉगते हो कि अगर वह हमें (अब की दफ़ा) उस (बला) से छुटकारा दे तो हम ज़रुर उसके शुक्र गुज़ार (बन्दे होकर) रहेगें