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هُوَ الَّذِيْ بَعَثَ فِى الْاُمِّيّٖنَ رَسُوْلًا مِّنْهُمْ يَتْلُوْا عَلَيْهِمْ اٰيٰتِهٖ وَيُزَكِّيْهِمْ وَيُعَلِّمُهُمُ الْكِتٰبَ وَالْحِكْمَةَ وَاِنْ كَانُوْا مِنْ قَبْلُ لَفِيْ ضَلٰلٍ مُّبِيْنٍۙ   ( الجمعة: ٢ )

He
هُوَ
वो ही है
(is) the One Who
ٱلَّذِى
जिसने
sent
بَعَثَ
भेजा
among
فِى
अनपढ़ लोगों में
the unlettered
ٱلْأُمِّيِّۦنَ
अनपढ़ लोगों में
a Messenger
رَسُولًا
एक रसूल
from themselves
مِّنْهُمْ
उन्हीं में से
reciting
يَتْلُوا۟
जो तिलावत करता है
to them
عَلَيْهِمْ
उन पर
His Verses
ءَايَٰتِهِۦ
उसकी आयात
and purifying them
وَيُزَكِّيهِمْ
और वो तज़किया करता है उनका
and teaching them
وَيُعَلِّمُهُمُ
और वो सिखाता है उन्हें
the Book
ٱلْكِتَٰبَ
किताब
and the wisdom
وَٱلْحِكْمَةَ
और हिकमत
although
وَإِن
और बेशक
they were
كَانُوا۟
थे वो
from
مِن
इससे पहले
before
قَبْلُ
इससे पहले
surely in
لَفِى
अलबत्ता गुमराही में
an error
ضَلَٰلٍ
अलबत्ता गुमराही में
clear
مُّبِينٍ
खुली

Huwa allathee ba'atha fee alommiyyeena rasoolan minhum yatloo 'alayhim ayatihi wayuzakkeehim wayu'allimuhumu alkitaba waalhikmata wain kanoo min qablu lafee dalalin mubeenin (al-Jumuʿah 62:2)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

वही है जिसने उम्मियों में उन्हीं में से एक रसूल उठाया जो उन्हें उसकी आयतें पढ़कर सुनाता है, उन्हें निखारता है और उन्हें किताब और हिकमत (तत्वदर्शिता) की शिक्षा देता है, यद्यपि इससे पहले तो वे खुली हुई गुमराही में पड़े हुए थे, -

English Sahih:

It is He who has sent among the unlettered [Arabs] a Messenger from themselves reciting to them His verses and purifying them and teaching them the Book [i.e., the Quran] and wisdom [i.e., the sunnah] – although they were before in clear error – ([62] Al-Jumu'ah : 2)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

वही तो जिसने जाहिलों में उन्हीं में का एक रसूल (मोहम्मद) भेजा जो उनके सामने उसकी आयतें पढ़ते और उनको पाक करते और उनको किताब और अक्ल की बातें सिखाते हैं अगरचे इसके पहले तो ये लोग सरीही गुमराही में (पड़े हुए) थे