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وَقَالَ الْمَلَاُ الَّذِيْنَ كَفَرُوْا مِنْ قَوْمِهٖ لَىِٕنِ اتَّبَعْتُمْ شُعَيْبًا ِانَّكُمْ اِذًا لَّخٰسِرُوْنَ  ( الأعراف: ٩٠ )

And said
وَقَالَ
और कहा
the chiefs
ٱلْمَلَأُ
सरदारों ने
(of) those who
ٱلَّذِينَ
जिन्होंने
disbelieved
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
among
مِن
उसकी क़ौम में से
his people
قَوْمِهِۦ
उसकी क़ौम में से
"If
لَئِنِ
अलबत्ता अगर
you follow
ٱتَّبَعْتُمْ
पैरवी की तुमने
Shuaib
شُعَيْبًا
शुऐब की
indeed you
إِنَّكُمْ
बेशक तुम
then
إِذًا
तब
(will be) certainly losers"
لَّخَٰسِرُونَ
अलबत्ता ख़सारा पाने वाले हो

Waqala almalao allatheena kafaroo min qawmihi laini ittaba'tum shu'ayban innakum ithan lakhasiroona (al-ʾAʿrāf 7:90)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

और क़ौम के सरदार, जिन्होंने इनकार किया था, बोले, 'यदि तुम शुऐब के अनुयायी बने तो तुम घाटे में पड़ जाओगे।'

English Sahih:

Said the eminent ones who disbelieved among his people, "If you should follow Shuaib, indeed, you would then be losers." ([7] Al-A'raf : 90)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और उनकी क़ौम के चन्द सरदार जो काफिर थे (लोगों से) कहने लगे कि अगर तुम लोगों ने शुएब की पैरवी की तो उसमें शक़ ही नहीं कि तुम सख्त घाटे में रहोगे