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अत-तौबा आयत ३८ | At-Taubah 9:38

O you who believe!
يَٰٓأَيُّهَا
ऐ लोगो जो
O you who believe!
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
O you who believe!
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
What
مَا
क्या है
(is the matter) with you
لَكُمْ
तुम्हें
when
إِذَا
जब
it is said
قِيلَ
कहा जाता है
to you
لَكُمُ
तुमसे
go forth
ٱنفِرُوا۟
निकलो
in
فِى
अल्लाह के रास्ते में
(the) way
سَبِيلِ
अल्लाह के रास्ते में
(of) Allah
ٱللَّهِ
अल्लाह के रास्ते में
you cling heavily
ٱثَّاقَلْتُمْ
बोझल हो जाते हो तुम
to
إِلَى
तरफ़ ज़मीन के
the earth?
ٱلْأَرْضِۚ
तरफ़ ज़मीन के
Are you pleased
أَرَضِيتُم
क्या राज़ी हो गए तुम
with the life
بِٱلْحَيَوٰةِ
ज़िन्दगी पर
(of) the world
ٱلدُّنْيَا
दुनिया की
(rather) than
مِنَ
आख़िरत के (मुक़ाबले में)
the Hereafter?
ٱلْءَاخِرَةِۚ
आख़िरत के (मुक़ाबले में)
But what
فَمَا
तो नहीं
(is the) enjoyment
مَتَٰعُ
सामान
(of) the life
ٱلْحَيَوٰةِ
ज़िन्दगी का
(of) the world
ٱلدُّنْيَا
दुनिया की
in (comparison to)
فِى
आख़िरत के (मुक़ाबले में)
the hereafter
ٱلْءَاخِرَةِ
आख़िरत के (मुक़ाबले में)
except
إِلَّا
मगर
a little
قَلِيلٌ
बहुत थोड़ा

Ya ayyuha allatheena amanoo ma lakum itha qeela lakumu infiroo fee sabeeli Allahi iththaqaltum ila alardi aradeetum bialhayati alddunya mina alakhirati fama mata'u alhayati alddunya fee alakhirati illa qaleelun

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

ऐ ईमान लानेवालो! तुम्हें क्या हो गया है कि जब तुमसे कहा जाता है, 'अल्लाह के मार्ग में निकलो' तो तुम धरती पर ढहे जाते हो? क्या तुम आख़िरत की अपेक्षा सांसारिक जीवन पर राज़ी हो गए? सांसारिक जीवन की सुख-सामग्री तो आख़िरत के हिसाब में है कुछ थोड़ी ही!

English Sahih:

O you who have believed, what is [the matter] with you that, when you are told to go forth in the cause of Allah, you adhere heavily to the earth? Are you satisfied with the life of this world rather than the Hereafter? But what is the enjoyment of worldly life compared to the Hereafter except a [very] little.

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

ऐ ईमानदारों तुम्हें क्या हो गया है कि जब तुमसे कहा जाता है कि ख़ुदा की राह में (जिहाद के लिए) निकलो तो तुम लदधड़ (ढीले) हो कर ज़मीन की तरफ झुके पड़ते हो क्या तुम आख़िरत के बनिस्बत दुनिया की (चन्द रोज़ा) जिन्दगी को पसन्द करते थे तो (समझ लो कि) दुनिया की ज़िन्दगी का साज़ो सामान (आख़िर के) ऐश व आराम के मुक़ाबले में बहुत ही थोड़ा है

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

हे ईमान वालो! तुम्हें क्या हो गया है कि जब तुमसे कहा जाये कि अल्लाह की राह में निकलो, तो धरती के बोझ बन जाते हो, क्या तुम आख़िरत (परलोक) की अपेक्षा सांसारिक जीवन से प्रसन्न हो गये हो? जबकि परलोक की अपेक्षा सांसारिक जीवन के लाभ बहुत थोड़े हैं[1]।