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وَمَا مَنَعَهُمْ اَنْ تُقْبَلَ مِنْهُمْ نَفَقٰتُهُمْ اِلَّآ اَنَّهُمْ كَفَرُوْا بِاللّٰهِ وَبِرَسُوْلِهٖ وَلَا يَأْتُوْنَ الصَّلٰوةَ اِلَّا وَهُمْ كُسَالٰى وَلَا يُنْفِقُوْنَ اِلَّا وَهُمْ كٰرِهُوْنَ   ( التوبة: ٥٤ )

And not
وَمَا
और नहीं
prevents them
مَنَعَهُمْ
मानेअ/रुकावट हुआ उनके
that
أَن
कि
is accepted
تُقْبَلَ
क़ुबूल किए जाऐं
from them
مِنْهُمْ
उनसे
their contributions
نَفَقَٰتُهُمْ
सदक़ात उनके
except
إِلَّآ
मगर
that they
أَنَّهُمْ
ये कि वो
disbelieve
كَفَرُوا۟
उन्होंने कुफ़्र किया
in Allah
بِٱللَّهِ
साथ अल्लाह के
and in His Messenger
وَبِرَسُولِهِۦ
और साथ उसके रसूल के
and not
وَلَا
और नहीं
they come
يَأْتُونَ
वो आते
(to) the prayer
ٱلصَّلَوٰةَ
नमाज़ को
except
إِلَّا
मगर
while they
وَهُمْ
इस हाल में कि वो
(are) lazy
كُسَالَىٰ
सुस्त होते हैं
and not
وَلَا
और नहीं
they spend
يُنفِقُونَ
वो ख़र्च करते
except
إِلَّا
मगर
while they
وَهُمْ
इस हाल में कि वो
(are) unwilling
كَٰرِهُونَ
नापसंद करने वाले हैं

Wama mana'ahum an tuqbala minhum nafaqatuhum illa annahum kafaroo biAllahi wabirasoolihi wala yatoona alssalata illa wahum kusala wala yunfiqoona illa wahum karihoona (at-Tawbah 9:54)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

उनके ख़र्च के स्वीकृत होने में इसके अतिरिक्त और कोई चीज़ बाधक नहीं कि उन्होंने अल्लाह औऱ उसके रसूल के साथ कुफ़्र किया। नमाज़ को आते है तो बस हारे जी आते है और ख़र्च करते है, तो अनिच्छापूर्वक ही

English Sahih:

And what prevents their expenditures from being accepted from them but that they have disbelieved in Allah and in His Messenger and that they come not to prayer except while they are lazy and that they do not spend except while they are unwilling. ([9] At-Tawbah : 54)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और उनकी ख़ैरात के क़ुबूल किए जाने में और कोई वजह मायने नहीं मगर यही कि उन लोगों ने ख़ुदा और उसके रसूल की नाफ़रमानी की और नमाज़ को आते भी हैं तो अलकसाए हुए और ख़ुदा की राह में खर्च करते भी हैं तो बे दिली से