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وَيَوْمَ نَبْعَثُ مِنْ كُلِّ اُمَّةٍ شَهِيْدًا ثُمَّ لَا يُؤْذَنُ لِلَّذِيْنَ كَفَرُوْا وَلَا هُمْ يُسْتَعْتَبُوْنَ   ( النحل: ٨٤ )

And the Day
وَيَوْمَ
और जिस दिन
We will resurrect
نَبْعَثُ
हम खड़ा करेंगे
from
مِن
हर उम्मत से
every
كُلِّ
हर उम्मत से
nation
أُمَّةٍ
हर उम्मत से
a witness
شَهِيدًا
एक गवाह
then
ثُمَّ
फिर
not
لَا
ना इजाज़त दी जाएगी
will be permitted
يُؤْذَنُ
ना इजाज़त दी जाएगी
to those who
لِلَّذِينَ
उनके जिन्होंने
disbelieved
كَفَرُوا۟
कुफ़्र किया
and not
وَلَا
और ना
they
هُمْ
वो
will be asked to make amends
يُسْتَعْتَبُونَ
वो उज़्र क़ुबूल किए जाऐंगे

Wayawma nab'athu min kulli ommatin shaheedan thumma la yuthanu lillatheena kafaroo wala hum yusta'taboona (an-Naḥl 16:84)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

याद करो जिस दिन हम हर समुदाय में से एक गवाह खड़ा करेंगे, फिर जिन्होंने इनकार किया होगा उन्हें कोई अनुमति प्राप्त न होगी। और न उन्हें इसका अवसर ही दिया जाएगा वे उसे राज़ी कर लें

English Sahih:

And [mention] the Day when We will resurrect from every nation a witness [i.e., their prophet]. Then it will not be permitted to the disbelievers [to apologize or make excuses], nor will they be asked to appease [Allah]. ([16] An-Nahl : 84)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और जिस दिन हम एक उम्मत में से (उसके पैग़म्बरों को) गवाह बनाकर क़ब्रों से उठा खड़ा करेगे फिर तो काफिरों को न (बात करने की) इजाज़त दी जाएगी और न उनका उज्र (जवाब) ही सुना जाएगा