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وَكَانَ يَأْمُرُ اَهْلَهٗ بِالصَّلٰوةِ وَالزَّكٰوةِۖ وَكَانَ عِنْدَ رَبِّهٖ مَرْضِيًّا   ( مريم: ٥٥ )

And he used
وَكَانَ
और था वो
(to) enjoin
يَأْمُرُ
वो हुक्म देता
(on) his people
أَهْلَهُۥ
अपने घर वालों को
the prayer
بِٱلصَّلَوٰةِ
नमाज़ का
and zakah
وَٱلزَّكَوٰةِ
और ज़कात का
and was
وَكَانَ
और था वो
near
عِندَ
अपने रब का यहाँ
his Lord
رَبِّهِۦ
अपने रब का यहाँ
pleasing
مَرْضِيًّا
पसंदीदा

Wakana yamuru ahlahu bialssalati waalzzakati wakana 'inda rabbihi mardiyyan (Maryam 19:55)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

और अपने लोगों को नमाज़ और ज़कात का हुक्म देता था। और वह अपने रब के यहाँ प्रीतिकर व्यक्ति था

English Sahih:

And he used to enjoin on his people prayer and Zakah and was to his Lord pleasing [i.e., accepted by Him]. ([19] Maryam : 55)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और अपने घर के लोगों को नमाज़ पढ़ने और ज़कात देने की ताकीद किया करते थे और अपने परवरदिगार की बारगाह में पसन्दीदा थे