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وَعِبَادُ الرَّحْمٰنِ الَّذِيْنَ يَمْشُوْنَ عَلَى الْاَرْضِ هَوْنًا وَّاِذَا خَاطَبَهُمُ الْجٰهِلُوْنَ قَالُوْا سَلٰمًا   ( الفرقان: ٦٣ )

And (the) slaves
وَعِبَادُ
और बन्दे
(of) the Most Gracious
ٱلرَّحْمَٰنِ
रहमान के
(are) those who
ٱلَّذِينَ
वो हैं जो
walk
يَمْشُونَ
चलते हैं
on
عَلَى
ज़मीन पर
the earth
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन पर
(in) humbleness
هَوْنًا
आहिस्तगी से
and when
وَإِذَا
और जब
address them
خَاطَبَهُمُ
मुख़ातिब होते हैं उनसे
the ignorant ones
ٱلْجَٰهِلُونَ
जाहिल लोग
they say
قَالُوا۟
वो कहते हैं
"Peace"
سَلَٰمًا
सलाम

Wa'ibadu alrrahmani allatheena yamshoona 'ala alardi hawnan waitha khatabahumu aljahiloona qaloo salaman (al-Furq̈ān 25:63)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

रहमान के (प्रिय) बन्दें वहीं है जो धरती पर नम्रतापूर्वक चलते है और जब जाहिल उनके मुँह आएँ तो कह देते है, 'तुमको सलाम!'

English Sahih:

And the servants of the Most Merciful are those who walk upon the earth easily, and when the ignorant address them [harshly], they say [words of] peace, ([25] Al-Furqan : 63)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और (ख़ुदाए) रहमान के ख़ास बन्दे तो वह हैं जो ज़मीन पर फिरौतनी के साथ चलते हैं और जब जाहिल उनसे (जिहालत) की बात करते हैं तो कहते हैं कि सलाम (तुम सलामत रहो)