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अल-अनकबूत आयत ४६ | Al-Ankabut 29:46

And (do) not
وَلَا
और ना
argue
تُجَٰدِلُوٓا۟
तुम झगड़ा करो
(with the) People of the Book
أَهْلَ
अहले किताब से
(with the) People of the Book
ٱلْكِتَٰبِ
अहले किताब से
except
إِلَّا
मगर
by which
بِٱلَّتِى
उस तरीक़े से जो
[it]
هِىَ
वो
(is) best
أَحْسَنُ
सबसे अच्छा है
except
إِلَّا
सिवाए
those who
ٱلَّذِينَ
उनके जिन्होंने
(do) wrong
ظَلَمُوا۟
ज़ुल्म किया
among them
مِنْهُمْۖ
उनमें से
and say
وَقُولُوٓا۟
और कहो
"We believe
ءَامَنَّا
ईमान लाए हम
in that (which)
بِٱلَّذِىٓ
उस पर जो
has been revealed
أُنزِلَ
नाज़िल किया गया
to us
إِلَيْنَا
हमारी तरफ़
and was revealed
وَأُنزِلَ
और नाज़िल किया गया
to you
إِلَيْكُمْ
तुम्हारी तरफ़
And our God
وَإِلَٰهُنَا
और इलाह हमारा
and your God
وَإِلَٰهُكُمْ
और इलाह तुम्हारा
(is) One
وَٰحِدٌ
एक ही है
and we
وَنَحْنُ
और हम
to Him
لَهُۥ
उसी के
submit"
مُسْلِمُونَ
फ़रमाबरदार हैं

Wala tujadiloo ahla alkitabi illa biallatee hiya ahsanu illa allatheena thalamoo minhum waqooloo amanna biallathee onzila ilayna waonzila ilaykum wailahuna wailahukum wahidun wanahnu lahu muslimoona

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

और किताबवालों से बस उत्तम रीति ही से वाद-विवाद करो - रहे वे लोग जो उनमें ज़ालिम हैं, उनकी बात दूसरी है - और कहो - 'हम ईमान लाए उस चीज़ पर जो अवतरित हुई और तुम्हारी ओर भी अवतरित हुई। और हमारा पूज्य और तुम्हारा पूज्य अकेला ही है और हम उसी के आज्ञाकारी है।'

English Sahih:

And do not argue with the People of the Scripture except in a way that is best, except for those who commit injustice among them, and say, "We believe in that which has been revealed to us and revealed to you. And our God and your God is one; and we are Muslims [in submission] to Him."

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और (ऐ ईमानदारों) अहले किताब से मनाज़िरा न किया करो मगर उमदा और शाएस्ता अलफाज़ व उनवान से लेकिन उनमें से जिन लोगों ने तुम पर ज़ुल्म किया (उनके साथ रिआयत न करो) और साफ साफ कह दो कि जो किताब हम पर नाज़िल हुई और जो किताब तुम पर नाज़िल हुई है हम तो सब पर ईमान ला चुके और हमारा माबूद और तुम्हारा माबूद एक ही है और हम उसी के फरमाबरदार है

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

और तुम वाद-विवाद न करो अह्ले किताब[1] से, परन्तु ऐसी विधि से, जो सर्वोत्तम हो, उनके सिवा, जिन्होंने अत्याचार किया है उनमें से तथा तुम कहो कि हम ईमान लाये उसपर, जो हमारी ओर उतारा गया और उतारा गया तुम्हारी ओर तथा हमारा पूज्य और तुम्हारा पूज्य एक ही[2] है और हम उसी के आज्ञाकारी हैं।[3]