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आले इमरान आयत १७२ | Aal-e-Imran 3:172

Those who
ٱلَّذِينَ
वो जिन्होंने
responded
ٱسْتَجَابُوا۟
हुक्म माना
to Allah
لِلَّهِ
अल्लाह का
and the Messenger
وَٱلرَّسُولِ
और रसूल का
from
مِنۢ
बाद इसके
after
بَعْدِ
बाद इसके
what
مَآ
जो
befell them
أَصَابَهُمُ
पहुँचा उन्हें
the injury
ٱلْقَرْحُۚ
ज़ख़्म
for those who
لِلَّذِينَ
उनके लिए जिन्होंने
did good
أَحْسَنُوا۟
एहसान किया
among them
مِنْهُمْ
उनमें से
and feared Allah
وَٱتَّقَوْا۟
और तक़वा किया
(is) a reward
أَجْرٌ
अजर है
great
عَظِيمٌ
बहुत बड़ा

Allatheena istajaboo lillahi waalrrasooli min ba'di ma asabahumu alqarhu lillatheena ahsanoo minhum waittaqaw ajrun 'atheemun

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

जिन लोगों ने अल्लाह और रसूल की पुकार को स्वीकार किया, इसके पश्चात कि उन्हें आघात पहुँच चुका था। इन सत्कर्मी और (अल्लाह का) डर रखनेवालों के लिए बड़ा प्रतिदान है

English Sahih:

Those [believers] who responded to Allah and the Messenger after injury had struck them. For those who did good among them and feared Allah is a great reward –

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

निहाल हो रहे हैं (जंगे ओहद में) जिन लोगों ने जख्म खाने के बाद भी ख़ुदा और रसूल का कहना माना उनमें से जिन लोगों ने नेकी और परहेज़गारी की (सब के लिये नहीं सिर्फ) उनके लिये बड़ा सवाब है

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

जिन्होंने अल्लाह और रसूल की पुकार स्वीकार[1] की, इसके पश्चात् कि उन्हें आघात पहुँचा, उनमें से उनके लिए जिन्होंने सुकर्म किया तथा (अल्लाह से) डरे, महा प्रतिफल है।