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अर-रूम आयत २८ | Ar-Rum 30:28

He sets forth
ضَرَبَ
उसने बयान की
to you
لَكُم
तुम्हारे लिए
an example
مَّثَلًا
एक मिसाल
from
مِّنْ
तुम्हारे नफ़्सों में से
yourselves
أَنفُسِكُمْۖ
तुम्हारे नफ़्सों में से
Is
هَل
क्या हैं
for you
لَّكُم
तुम्हारे लिए
among
مِّن
उसमें से जो
what
مَّا
उसमें से जो
posses
مَلَكَتْ
मालिक हैं
your right hands
أَيْمَٰنُكُم
दाऐं हाथ तुम्हारे
any
مِّن
कुछ शरीक
partners
شُرَكَآءَ
कुछ शरीक
in
فِى
उसमें जो
what
مَا
उसमें जो
We have provided you
رَزَقْنَٰكُمْ
रिज़्क़ दिया हमने तुम्हें
so you
فَأَنتُمْ
तो तुम
in it
فِيهِ
उसमें
(are) equal
سَوَآءٌ
बराबर हो
you fear them
تَخَافُونَهُمْ
तुम डरते हो उनसे
as you fear
كَخِيفَتِكُمْ
जैसे डरना तुम्हारा
yourselves?
أَنفُسَكُمْۚ
अपने नफ़्सों (जैसों) से
Thus
كَذَٰلِكَ
इसी तरह
We explain
نُفَصِّلُ
हम खोलकर बयान करते हैं
the Verses
ٱلْءَايَٰتِ
आयात
for a people
لِقَوْمٍ
उन लोगों के लिए
(who) use reason
يَعْقِلُونَ
जो अक़्ल रखते हैं

Daraba lakum mathalan min anfusikum hal lakum mi mma malakat aymanukum min shurakaa fee ma razaqnakum faantum feehi sawaon takhafoonahum kakheefatikum anfusakum kathalika nufassilu alayati liqawmin ya'qiloona

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

उसने तुम्हारे लिए स्वयं तुम्हीं में से एक मिसाल पेश की है। क्या जो रोज़ी हमने तुम्हें दी है, उसमें तुम्हारे अधीनस्थों में से, कुछ तुम्हारे साझीदार है कि तुम सब उसमें बराबर के हो, तुम उनका ऐसा डर रखते हो जैसा अपने लोगों का डर रखते हो? - इसप्रकार हम उन लोगों के लिए आयतें खोल-खोलकर प्रस्तुत करते है जो बुद्धि से काम लेते है। -

English Sahih:

He presents to you an example from yourselves. Do you have among those whom your right hands possess [i.e., slaves] any partners in what We have provided for you so that you are equal therein [and] would fear them as your fear of one another [within a partnership]? Thus do We detail the verses for a people who use reason.

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और हमने (तुम्हारे समझाने के वास्ते) तुम्हारी ही एक मिसाल बयान की है हमने जो कुछ तुम्हे अता किया है क्या उसमें तुम्हारी लौन्डी गुलामों में से कोई (भी) तुम्हारा शरीक है कि (वह और) तुम उसमें बराबर हो जाओ (और क्या) तुम उनसे ऐसा ही ख़ौफ रखते हो जितना तुम्हें अपने लोगों का (हक़ हिस्सा न देने में) ख़ौफ होता है फिर बन्दों को खुदा का शरीक क्यों बनाते हो) अक्ल मन्दों के वास्ते हम यूँ अपनी आयतों को तफसीलदार बयान करते हैं

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

उसने एक उदाहरण दिया है स्वयं तुम्हाराः क्या तुम्हारे[1] दासों में से तुम्हारा कोई साझी है उसमें, जो जीविका प्रदान की है हमने तुम्हें, तो तुम उसमें उसके बराबर हो, उनसे डरते हो जैसे अपनों से डरते हो? इसी प्रकार, हम वर्णन करते हैं आयतों का, उन लोगों के लिए, जो समझ रखते हैं।