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يُدَبِّرُ الْاَمْرَ مِنَ السَّمَاۤءِ اِلَى الْاَرْضِ ثُمَّ يَعْرُجُ اِلَيْهِ فِيْ يَوْمٍ كَانَ مِقْدَارُهٗٓ اَلْفَ سَنَةٍ مِّمَّا تَعُدُّوْنَ  ( السجدة: ٥ )

He regulates
يُدَبِّرُ
वो तदबीर करता है
the affair
ٱلْأَمْرَ
हर मामले की
of
مِنَ
आसमान से
the heaven
ٱلسَّمَآءِ
आसमान से
to
إِلَى
ज़मीन तक
the earth
ٱلْأَرْضِ
ज़मीन तक
then
ثُمَّ
फिर
it will ascend
يَعْرُجُ
वो चढ़ता है
to Him
إِلَيْهِ
तरफ़ उसके
in
فِى
एक दिन में
a Day
يَوْمٍ
एक दिन में
(the) measure of which is
كَانَ
है
(the) measure of which is
مِقْدَارُهُۥٓ
हिसाब/अंदाज़ा उसका
a thousand
أَلْفَ
हज़ार
years
سَنَةٍ
साल
of what
مِّمَّا
उसमें से जो
you count
تَعُدُّونَ
तुम शुमार करते हो

Yudabbiru alamra mina alssamai ila alardi thumma ya'ruju ilayhi fee yawmin kana miqdaruhu alfa sanatin mimma ta'uddoona (as-Sajdah 32:5)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

वह कार्य की व्यवस्था करता है आकाश से धरती तक - फिर सारे मामले उसी की तरफ़ लौटते है - एक दिन में, जिसकी माप तुम्हारी गणना के अनुसार एक हज़ार वर्ष है

English Sahih:

He arranges [each] matter from the heaven to the earth; then it will ascend to Him in a Day, the extent of which is a thousand years of those which you count. ([32] As-Sajdah : 5)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

आसमान से ज़मीन तक के हर अम्र का वही मुद्ब्बिर (व मुन्तज़िम) है फिर ये बन्दोबस्त उस दिन जिस की मिक़दार तुम्हारे शुमार से हज़ार बरस से होगी उसी की बारगाह में पेश होगा