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ۨالَّذِيْنَ يُبَلِّغُوْنَ رِسٰلٰتِ اللّٰهِ وَيَخْشَوْنَهٗ وَلَا يَخْشَوْنَ اَحَدًا اِلَّا اللّٰهَ ۗوَكَفٰى بِاللّٰهِ حَسِيْبًا   ( الأحزاب: ٣٩ )

Those who
ٱلَّذِينَ
वो लोग जो
convey
يُبَلِّغُونَ
पहुँचाते हैं
(the) Messages
رِسَٰلَٰتِ
पैग़ामात
(of) Allah
ٱللَّهِ
अल्लाह के
and fear Him
وَيَخْشَوْنَهُۥ
और वो डरते हैं उससे
and (do) not
وَلَا
और नहीं
fear
يَخْشَوْنَ
वो डरते
anyone
أَحَدًا
किसी एक से भी
except
إِلَّا
सिवाए
Allah
ٱللَّهَۗ
अल्लाह के
And sufficient is Allah
وَكَفَىٰ
और काफ़ी है
And sufficient is Allah
بِٱللَّهِ
अल्लाह
(as) a Reckoner
حَسِيبًا
हिसाब लेने वाला

Allatheena yuballighoona risalati Allahi wayakhshawnahu wala yakhshawna ahadan illa Allaha wakafa biAllahi haseeban (al-ʾAḥzāb 33:39)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

जो अल्लाह के सन्देश पहुँचाते थे और उसी से डरते थे और अल्लाह के सिवा किसी से नहीं डरते थे। और हिसाब लेने के लिए अल्लाह काफ़ी है। -

English Sahih:

[Allah praises] those who convey the messages of Allah and fear Him and do not fear anyone but Allah. And sufficient is Allah as Accountant. ([33] Al-Ahzab : 39)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

वह लोग जो खुदा के पैग़ामों को (लोगों तक जूँ का तूँ) पहुँचाते थे और उससे डरते थे और खुदा के सिवा किसी से नहीं डरते थे (फिर तुम क्यों डरते हो) और हिसाब लेने के वास्ते तो खुद काफ़ी है