Skip to main content

وَالَّذِيْنَ سَعَوْ فِيْٓ اٰيٰتِنَا مُعٰجِزِيْنَ اُولٰۤىِٕكَ لَهُمْ عَذَابٌ مِّنْ رِّجْزٍ اَلِيْمٌ   ( سبإ: ٥ )

But those who
وَٱلَّذِينَ
और वो जिन्होंने
strive
سَعَوْ
कोशिश की
against
فِىٓ
हमारी आयात में
Our Verses
ءَايَٰتِنَا
हमारी आयात में
(to) cause failure -
مُعَٰجِزِينَ
इस हाल में कि आजिज़ करने वाले हैं
those -
أُو۟لَٰٓئِكَ
यही लोग हैं
for them
لَهُمْ
उनके लिए
(is) a punishment
عَذَابٌ
अज़ाब है
of
مِّن
सख़्ती का
foul nature
رِّجْزٍ
सख़्ती का
painful
أَلِيمٌ
दर्दनाक

Waallatheena sa'aw fee ayatina mu'ajizeena olaika lahum 'athabun min rijzin aleemin (Sabaʾ 34:5)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

'रहे वे लोग जिन्होंने हमारी आयतों को मात करने का प्रयास किया, वह है जिनके लिए बहुत ही बुरे प्रकार की दुखद यातना है।'

English Sahih:

But those who strive against Our verses [seeking] to cause failure – for them will be a painful punishment of foul nature. ([34] Saba : 5)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

और जिन लोगों ने हमारी आयतों (के तोड़) में मुक़ाबिले की दौड़-धूप की उन ही के लिए दर्दनाक अज़ाब की सज़ा होगी