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Indeed We
إِنَّا
बेशक हम
subjected
سَخَّرْنَا
मुसख़्खर किया हमने
the mountains
ٱلْجِبَالَ
पहाड़ों को
with him
مَعَهُۥ
साथ उसके
glorifying
يُسَبِّحْنَ
वो तस्बीह करते थे
in the evening
بِٱلْعَشِىِّ
शाम को
and [the] sunrise
وَٱلْإِشْرَاقِ
और सुबह को

Inna sakhkharna aljibala ma'ahu yusabbihna bial'ashiyyi waalishraqi

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

हमने पर्वतों को उसके साथ वशीभूत कर दिया था कि प्रातःकाल और सन्ध्य समय तसबीह करते रहे।

English Sahih:

Indeed, We subjected the mountains [to praise] with him, exalting [Allah] in the [late] afternoon and [after] sunrise.

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

बेशक वह हमारी बारगाह में बड़े रूजू करने वाले थे हमने पहाड़ों को भी ताबेदार बना दिया था कि उनके साथ सुबह और शाम (खुदा की) तस्बीह करते थे

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

हमने वश्वर्ती कर दिया था पर्वतों को, जो उसके साथ पवित्रता गान करते थे, संध्या तथा प्रातः।