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अज-ज़ुमर आयत ४१ | Az-Zumar 39:41

Indeed We
إِنَّآ
बेशक हम
We revealed
أَنزَلْنَا
नाज़िल की हमने
to you
عَلَيْكَ
आप पर
the Book
ٱلْكِتَٰبَ
किताब
for [the] mankind
لِلنَّاسِ
लोगों के लिए
in truth
بِٱلْحَقِّۖ
साथ हक़ के
So whoever
فَمَنِ
तो जो
accepts guidance
ٱهْتَدَىٰ
हिदायत पा जाए
then (it is) for his soul;
فَلِنَفْسِهِۦۖ
तो उसके अपने ही लिए है
and whoever
وَمَن
और जो कोई
goes astray
ضَلَّ
भटके
then only
فَإِنَّمَا
तो बेशक
he strays
يَضِلُّ
वो भटकता है
against his (soul)
عَلَيْهَاۖ
अपने ख़िलाफ़
And not
وَمَآ
और नहीं
you
أَنتَ
आप
(are) over them
عَلَيْهِم
उन पर
a manager
بِوَكِيلٍ
कोई ज़िम्मेदार

Inna anzalna 'alayka alkitaba lilnnasi bialhaqqi famani ihtada falinafsihi waman dalla fainnama yadillu 'alayha wama anta 'alayhim biwakeelin

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

निश्चय ही हमने लोगों के लिए हक़ के साथ तुमपर किताब अवतरित की है। अतः जिसने सीधा मार्ग ग्रहण किया तो अपने ही लिए, और जो भटका, तो वह भटककर अपने ही को हानि पहुँचाता है। तुम उनके ज़िम्मेदार नहीं हो

English Sahih:

Indeed, We sent down to you the Book for the people in truth. So whoever is guided – it is for [the benefit of] his soul; and whoever goes astray only goes astray to its detriment. And you are not a manager [i.e., authority] over them.

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

(ऐ रसूल) हमने तुम्हारे पास (ये) किताब (क़ुरान) सच्चाई के साथ लोगों (की हिदायत) के वास्ते नाज़िल की है, पस जो राह पर आया तो अपने ही (भले के) लिए और जो गुमराह हुआ तो उसकी गुमराही का वबाल भी उसी पर है और फिर तुम कुछ उनके ज़िम्मेदार तो हो नहीं

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

वास्तव में, हमने ही अवतरित की है आपपर ये पुस्तक, लोगों के लिए सत्य के साथ। तो जिसने मार्गदर्शन प्राप्त कर लिया, तो उसके अपने (लाभ के) लिए है तथा जो कुपथ हो गया, तो वह कुपथ होता है अपने ऊपर तथा आप उनपर संरक्षक नहीं हैं।