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अल-फतह आयत १८ | Al-Fatah 48:18

Certainly
لَّقَدْ
अलबत्ता तहक़ीक़
Allah was pleased
رَضِىَ
राज़ी हो गया
Allah was pleased
ٱللَّهُ
अल्लाह
with
عَنِ
मोमिनों से
the believers
ٱلْمُؤْمِنِينَ
मोमिनों से
when
إِذْ
जब
they pledged allegiance to you
يُبَايِعُونَكَ
वो बैअत कर रहे थे आपसे
under
تَحْتَ
नीचे
the tree
ٱلشَّجَرَةِ
दरख़्त के
and He knew
فَعَلِمَ
तो उसने जान लिया
what
مَا
जो
(was) in
فِى
उनके दिलों में था
their hearts
قُلُوبِهِمْ
उनके दिलों में था
so He sent down
فَأَنزَلَ
तो उसने उतारी
the tranquility
ٱلسَّكِينَةَ
सकीनत /तस्कीन
upon them
عَلَيْهِمْ
उन पर
and rewarded them
وَأَثَٰبَهُمْ
और अता की उन्हें
(with) a victory
فَتْحًا
फ़तह
near
قَرِيبًا
क़रीबी

Laqad radiya Allahu 'ani almumineena ith yubayi'oonaka tahta alshshajarati fa'alima ma fee quloobihim faanzala alsakeenata 'alayhim waathabahum fathan qareeban

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

निश्चय ही अल्लाह मोमिनों से प्रसन्न हुआ, जब वे वृक्ष के नीचे तुमसे बैअत कर रहे थे। उसने जान लिया जो कुछ उनके दिलों में था। अतः उनपर उसने सकीना (प्रशान्ति) उतारी और बदले में उन्हें मिलनेवाली विजय निश्चित कर दी;

English Sahih:

Certainly was Allah pleased with the believers when they pledged allegiance to you, [O Muhammad], under the tree, and He knew what was in their hearts, so He sent down tranquility upon them and rewarded them with an imminent conquest

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

जिस वक्त मोमिनीन तुमसे दरख्त के नीचे (लड़ने मरने) की बैयत कर रहे थे तो ख़ुदा उनसे इस (बात पर) ज़रूर ख़ुश हुआ ग़रज़ जो कुछ उनके दिलों में था ख़ुदा ने उसे देख लिया फिर उन पर तस्सली नाज़िल फरमाई और उन्हें उसके एवज़ में बहुत जल्द फ़तेह इनायत की

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

अल्लाह प्रसन्न हो गया ईमान वालों से, जब वे आप (नबी) से बैअत कर रहे थे, वृक्ष के नीचे। उसने जान लिया जो कुछ उनके दिलों में था, इसलिए उतार दी शान्ति उनपर तथा उन्हें बदले में दी समीप की विजय।[1]