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لَيْسَ عَلَى الَّذِيْنَ اٰمَنُوْا وَعَمِلُوا الصّٰلِحٰتِ جُنَاحٌ فِيْمَا طَعِمُوْٓا اِذَا مَا اتَّقَوْا وَّاٰمَنُوْا وَعَمِلُوا الصّٰلِحٰتِ ثُمَّ اتَّقَوْا وَّاٰمَنُوْا ثُمَّ اتَّقَوْا وَّاَحْسَنُوْا ۗوَاللّٰهُ يُحِبُّ الْمُحْسِنِيْنَ ࣖ   ( المائدة: ٩٣ )

Not
لَيْسَ
नहीं है
on
عَلَى
ऊपर उनके जो
those who
ٱلَّذِينَ
ऊपर उनके जो
believe
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए
and do
وَعَمِلُوا۟
और उन्होंने अमल किए
the good deeds
ٱلصَّٰلِحَٰتِ
नेक
any sin
جُنَاحٌ
कोई गुनाह
for what
فِيمَا
उसमें जो
they ate
طَعِمُوٓا۟
उन्होंने खाया
when
إِذَا
जब
that
مَا
जब
they fear (Allah)
ٱتَّقَوا۟
उन्होंने तक़वा किया
and they believe
وَّءَامَنُوا۟
और वो ईमान लाए
and they do
وَعَمِلُوا۟
और उन्होंने अमल किए
[the] good deeds
ٱلصَّٰلِحَٰتِ
नेक
then
ثُمَّ
फिर
they fear (Allah)
ٱتَّقَوا۟
उन्होंने तक़वा किया
and believe
وَّءَامَنُوا۟
और वो ईमान लाए
then
ثُمَّ
फिर
they fear (Allah)
ٱتَّقَوا۟
उन्होंने तक़वा किया
and do good
وَّأَحْسَنُوا۟ۗ
और उन्होंने नेक काम किए
and Allah
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
loves
يُحِبُّ
वो पसंद करता है
the good-doers
ٱلْمُحْسِنِينَ
नेक काम करने वालों को

Laysa 'ala allatheena amanoo wa'amiloo alssalihati junahun feema ta'imoo itha ma ittaqaw waamanoo wa'amiloo alssalihati thumma ittaqaw waamanoo thumma ittaqaw waahsanoo waAllahu yuhibbu almuhsineena (al-Māʾidah 5:93)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

जो लोग ईमान लाए और उन्होंने अच्छे कर्म किए, वे पहले जो कुछ खा-पी चुके उसके लिए उनपर कोई गुनाह नहीं; जबकि वे डर रखें और ईमान पर क़ायम रहें और अच्छे कर्म करें। फिर डर रखें और ईमान लाए, फिर डर रखे और अच्छे से अच्छा कर्म करें। अल्लाह सत्कर्मियों से प्रेम करता है

English Sahih:

There is not upon those who believe and do righteousness [any] blame concerning what they have eaten [in the past] if they [now] fear Allah and believe and do righteous deeds, and then fear Allah and believe, and then fear Allah and do good; and Allah loves the doers of good. ([5] Al-Ma'idah : 93)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

(फिर करो चाहे न करो तुम मुख़तार हो) जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे (अच्छे) काम किए हैं उन पर जो कुछ खा (पी) चुके उसमें कुछ गुनाह नहीं जब उन्होंने परहेज़गारी की और ईमान ले आए और अच्छे (अच्छे) काम किए फिर परहेज़गारी की और नेकियाँ कीं और ख़ुदा नेकी करने वालों को दोस्त रखता है