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अल-मुमताहिना आयत १ | Al-Mumtahanah 60:1

O you!
يَٰٓأَيُّهَا
ऐ लोगो जो
who!
ٱلَّذِينَ
ऐ लोगो जो
believe!
ءَامَنُوا۟
ईमान लाए हो
(Do) not
لَا
ना तुम बनाओ
take
تَتَّخِذُوا۟
ना तुम बनाओ
My enemies
عَدُوِّى
मेरे दुश्मनों
and your enemies
وَعَدُوَّكُمْ
और अपने दुश्मनों क
(as) allies
أَوْلِيَآءَ
दोस्त
offering
تُلْقُونَ
तुम डालते हो
them
إِلَيْهِم
तरफ़ उनके
love
بِٱلْمَوَدَّةِ
दोस्ती (का पैग़ाम)
while
وَقَدْ
हालाँकि तहक़ीक़
they have disbelieved
كَفَرُوا۟
उन्होंने इन्कार किया
in what
بِمَا
उसका जो
came to you
جَآءَكُم
आया तुम्हारे पास
of
مِّنَ
हक़ में से
the truth
ٱلْحَقِّ
हक़ में से
driving out
يُخْرِجُونَ
वो निकालते हैं
the Messenger
ٱلرَّسُولَ
रसूल को
and yourselves
وَإِيَّاكُمْۙ
और तुम्हें
because
أَن
कि
you believe
تُؤْمِنُوا۟
तुम ईमान लाए हो
in Allah
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
your Lord
رَبِّكُمْ
जो रब है तुम्हारा
If
إِن
अगर
you
كُنتُمْ
हो तुम
come forth
خَرَجْتُمْ
निकले तुम
(to) strive
جِهَٰدًا
जिहाद के लिए
in
فِى
मेरे रास्ते में
My way
سَبِيلِى
मेरे रास्ते में
and (to) seek
وَٱبْتِغَآءَ
और चाहने को
My Pleasure
مَرْضَاتِىۚ
रज़ामन्दी मेरी
You confide
تُسِرُّونَ
तुम छुपा कर भेजते हो
to them
إِلَيْهِم
तरफ़ उनके
love
بِٱلْمَوَدَّةِ
दोस्ती (का पैग़ाम)
but I Am
وَأَنَا۠
और मैं
most knowing
أَعْلَمُ
ख़ूब जानता हूँ
of what
بِمَآ
उसे जो
you conceal
أَخْفَيْتُمْ
छुपाया तुमने
and what
وَمَآ
और जो
you declare
أَعْلَنتُمْۚ
ज़ाहिर किया तुमने
And whoever
وَمَن
और जो कोई
does it
يَفْعَلْهُ
करेगा उसे
among you
مِنكُمْ
तुम में से
then certainly
فَقَدْ
तो तहक़ीक़
he has strayed
ضَلَّ
वो भटक गया
(from the) straight
سَوَآءَ
सीधे
path
ٱلسَّبِيلِ
रास्ते से

Ya ayyuha allatheena amanoo la tattakhithoo 'aduwwee wa'aduwwakum awliyaa tulqoona ilayhim bialmawaddati waqad kafaroo bima jaakum mina alhaqqi yukhrijoona alrrasoola waiyyakum an tuminoo biAllahi rabbikum in kuntum kharajtum jihadan fee sabeelee waibtighaa mardatee tusirroona ilayhim bialmawaddati waana a'lamu bima akhfaytum wama a'lantum waman yaf'alhu minkum faqad dalla sawaa alssabeeli

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

ऐ ईमान लानेवालो! यदि तुम मेरे मार्ग में जिहाद के लिए और मेरी प्रसन्नता की तलाश में निकले हो तो मेरे शत्रुओं और अपने शत्रुओं को मित्र न बनाओ कि उनके प्रति प्रेम दिखाओं, जबकि तुम्हारे पास जो सत्य आया है उसका वे इनकार कर चुके है। वे रसूल को और तुम्हें इसलिए निर्वासित करते है कि तुम अपने रब - अल्लाह पर ईमान लाए हो। तुम गुप्त रूप से उनसे मित्रता की बातें करते हो। हालाँकि मैं भली-भाँति जानता हूँ जो कुछ तुम छिपाते हो और व्यक्त करते हो। और जो कोई भी तुममें से भटक गया

English Sahih:

O you who have believed, do not take My enemies and your enemies as allies, extending to them affection while they have disbelieved in what came to you of the truth, having driven out the Prophet and yourselves [only] because you believe in Allah, your Lord. If you have come out for jihad [i.e., fighting or striving] in My cause and seeking means to My approval, [take them not as friends]. You confide to them affection [i.e., instruction], but I am most knowing of what you have concealed and what you have declared. And whoever does it among you has certainly strayed from the soundness of the way.

1 | Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

ऐ ईमानदारों अगर तुम मेरी राह में जेहाद करने और मेरी ख़ुशनूदी की तमन्ना में (घर से) निकलते हो तो मेरे और अपने दुशमनों को दोस्त न बनाओ तुम उनके पास दोस्ती का पैग़ाम भेजते हो और जो दीन हक़ तुम्हारे पास आया है उससे वह लोग इनकार करते हैं वह लोग रसूल को और तुमको इस बात पर (घर से) निकालते हैं कि तुम अपने परवरदिगार ख़ुदा पर ईमान ले आए हो (और) तुम हो कि उनके पास छुप छुप के दोस्ती का पैग़ाम भेजते हो हालॉकि तुम कुछ भी छुपा कर या बिल एलान करते हो मैं उससे ख़ूब वाक़िफ़ हूँ और तुममें से जो शख़्श ऐसा करे तो वह सीधी राह से यक़ीनन भटक गया

2 | Azizul-Haqq Al-Umary

हे लोगो जो ईमान लाये हो! मेरे शत्रुओं तथा अपने शत्रुओं को मित्र ने बनाओ। तुम संदेश भेजते हो उनकी ओर मैत्री[1] का, जबकि उन्होंने कुफ़्र किया है उसका, जो तुम्हारे पास सत्य आया है। वे देश निकाला देते हैं रसूल को तथा तुमको इस कारण कि तुम ईमान लाये हो अल्लाह, अपने पालनहार पर? यदि तुम निकले हो जिहाद के लिए मेरी राह में और मेरी प्रसन्नता की खोज के लिए, तो गुप्त रूप से उन्हें मैत्री का संदेश भेजते हो? जबकि मैं भली-भाँति जानता हूँ उसे, जो तुम छुपाते हो और जो खुलकर करते हो? तथा जो करेगा ऐसा, तो निश्चय वह कुपथ हो गया सीधी राह से।