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لَا يَسْتَأْذِنُكَ الَّذِيْنَ يُؤْمِنُوْنَ بِاللّٰهِ وَالْيَوْمِ الْاٰخِرِ اَنْ يُّجَاهِدُوْا بِاَمْوَالِهِمْ وَاَنْفُسِهِمْۗ وَاللّٰهُ عَلِيْمٌۢ بِالْمُتَّقِيْنَ   ( التوبة: ٤٤ )

(Would) not ask your permission
لَا
नहीं इजाज़त माँगते आपसे
(Would) not ask your permission
يَسْتَـْٔذِنُكَ
नहीं इजाज़त माँगते आपसे
those who
ٱلَّذِينَ
वो जो
believe
يُؤْمِنُونَ
ईमान लाते हैं
in Allah
بِٱللَّهِ
अल्लाह पर
and the Day
وَٱلْيَوْمِ
और आख़िरी दिन पर
the Last
ٱلْءَاخِرِ
और आख़िरी दिन पर
that
أَن
कि
they strive
يُجَٰهِدُوا۟
वो जिहाद करें
with their wealth
بِأَمْوَٰلِهِمْ
साथ अपने मालों के
and their lives
وَأَنفُسِهِمْۗ
और अपनी जानों के
And Allah
وَٱللَّهُ
और अल्लाह
(is) All-Knower
عَلِيمٌۢ
ख़ूब जानने वाला है
of the righteous
بِٱلْمُتَّقِينَ
मुत्तक़ी लोगों के

La yastathinuka allatheena yuminoona biAllahi waalyawmi alakhiri an yujahidoo biamwalihim waanfusihim waAllahu 'aleemun bialmuttaqeena (at-Tawbah 9:44)

Muhammad Faruq Khan Sultanpuri & Muhammad Ahmed:

जो लोग अल्लाह और अंतिम दिन पर ईमान रखते है, वे तुमसे कभी यह नहीं चाहेंगे कि उन्हें अपने मालों और अपनी जानों के साथ जिहाद करने से माफ़ रखा जाए। और अल्लाह डर रखनेवालों को भली-भाँति जानता है

English Sahih:

Those who believe in Allah and the Last Day would not ask permission of you to be excused from striving [i.e., fighting] with their wealth and their lives. And Allah is Knowing of those who fear Him. ([9] At-Tawbah : 44)

1 Suhel Farooq Khan/Saifur Rahman Nadwi

(ऐ रसूल) जो लोग (दिल से) ख़ुदा और रोज़े आख़िरत पर ईमान रखते हैं वह तो अपने माल से और अपनी जानों से जिहाद (न) करने की इजाज़त मॉगने के नहीं (बल्कि वह ख़ुद जाऎंगे) और ख़ुदा परहेज़गारों से खूब वाक़िफ है